इंदौर: मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की कमर्शियल श्रेणी में राजस्व वसूली की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है. विभागीय समीक्षा बैठक में यह सामने आया कि दुकानें, मॉल, लघु उद्योग, आटा चक्की और शोरूम जैसे गैर घरेलू उपभोक्ताओं के करीब एक लाख कनेक्शनों पर लगभग 50 करोड़ रुपये से अधिक की बिजली बिल राशि बकाया है. लगातार बढ़ते बकाए ने विभाग की कार्यप्रणाली और वसूली तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
बुधवार को हुई समीक्षा बैठक में कंपनी के प्रबंध निदेशक अनूप कुमार सिंह ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए मई के शेष दिनों में हर हाल में वसूली अभियान तेज करने के निर्देश दिए. उन्होंने साफ कहा कि समय पर बिल वसूली विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है और लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. अधिकारियों से साप्ताहिक रिपोर्ट भी मांगी गई है, जिससे साफ है कि विभाग वसूली लक्ष्य पूरे नहीं होने से दबाव में है.
सूत्रों के अनुसार लंबे समय से कमर्शियल उपभोक्ताओं से बकाया वसूली प्रभावी ढंग से नहीं हो पाने के कारण विभाग की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है. सवाल यह भी उठ रहे हैं कि इतनी बड़ी संख्या में बकायादार बनने तक विभागीय अमला क्या कर रहा था. अब अचानक मई के अंतिम दिनों में बड़े पैमाने पर वसूली के निर्देश जारी होने से विभाग की तैयारी और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं. विभागीय हलकों में चर्चा है कि लगातार बढ़ते कमर्शियल बकाए और धीमी वसूली ने कंपनी प्रबंधन की चिंता बढ़ा दी है. आने वाले दिनों में बड़े बकायादारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और कनेक्शन काटने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं.
शिकायतों के निराकरण में देरी पर नाराजगी
बैठक में 1912 कॉल सेंटर और अन्य माध्यमों से आने वाली शिकायतों के निराकरण में देरी पर भी नाराजगी जताई गई. शहरों में एक से दो घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में दो से चार घंटे में शिकायतें हल करने के निर्देश दिए गए. इससे यह संकेत भी मिला कि उपभोक्ता शिकायतों के समाधान में अपेक्षित गति नहीं है. इसके अलावा खराब मीटर बदलने, लाइन मेंटेनेंस, आरडीएसएस और एसएसटीडी परियोजनाओं के कार्यों में देरी को लेकर भी अधिकारियों को निर्देश दिए गए. बारिश से पहले ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था सुधारने के आदेश दिए गए हैं
