रूस-चीन ने बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था के निर्माण के लिए घोषणापत्र पर किये हस्ताक्षर

बीजिंग, 21 मई (वार्ता) रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बुधवार को एक संयुक्त घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किये, जिसमें दुनिया में किसी एक देश के दबदबे के बजाय बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था की बात कही गयी है। इसके साथ ही दोनों नेताओं ने ऊर्जा, व्यापार और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अपनी मजबूत साझेदारी को और गहरा करने का भी वादा किया।

चीन के ‘ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल’ में हुई इस बैठक के बाद श्री शी ने पत्रकारों से कहा कि दोनों देशों के रिश्ते ‘बड़ी उपलब्धियों और तेज विकास के एक नये दौर में पहुंच चुके हैं।’ श्री पुतिन ने कहा कि रूस और चीन के संबंध ‘इतिहास के सबसे बेहतरीन स्तर’ पर हैं। उन्होंने श्री शी को अगले साल रूस आने का न्योता भी दिया।

दोनों देश 25 साल पहले हुए ‘चीन-रूस मित्रता और सहयोग समझौते’ को आगे बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। यह फैसला दिखाता है कि 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से एक-दूसरे के करीब आये दोनों देश आगे भी मिलकर काम करते रहेंगे।

श्री पुतिन ने चीन को बिना किसी रुकावट के तेल और गैस की आपूर्ति जारी रखने का वादा करते हुए कहा, “ हमारा आपसी व्यापार अब बाहरी दबाव से सुरक्षित है, क्योंकि हमने अमेरिकी डॉलर को छोड़कर अपनी-अपनी मुद्रा में लेन-देन शुरू कर दिया है।”

उन्होंने इसे एक सुरक्षित व्यापार व्यवस्था बताया, जिस पर वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव का असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने यह भी बताया कि रूस और भारत का लगभग 96 प्रतिशत व्यापार भी अब स्थानीय मुद्रा में हो रहा है।

खबरें यह भी हैं कि लंबे समय से अटकी ‘पावर ऑफ साइबेरिया 2’ पाइपलाइन परियोजना पर भी दोनों देशों के बीच सहमति बन गयी है। यह पाइपलाइन रूस से मंगोलिया होते हुए चीन तक हर साल 50 अरब घन मीटर प्राकृतिक गैस पहुंचाएगी।

श्री पुतिन ने ‘उत्तरी समुद्री मार्ग’ के विकास को अपनी प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि रूस और चीन मिलकर पूरे यूरेशिया क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभाएंगे।

श्री पुतिन के साथ श्री शी ने अमेरिकी विदेश नीति पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य होने के नाते दोनों देशों को ‘जिम्मेदार महाशक्तियों’ की तरह काम करना चाहिए और ‘एकतरफा दादागिरी एवं इतिहास को पीछे ले जाने वाले कदमों’ का विरोध करना चाहिए।

श्री शी ने कहा, “ अपनी मनमर्जी चलाने और दुनिया पर कब्जा जमाने की सोच से भारी नुकसान हो रहा है। इससे दुनिया में फिर से ‘जंगल राज’ आने का खतरा पैदा हो गया है।”

दोनों नेताओं ने कहा कि उनकी दोस्ती आपसी सम्मान, बराबरी और एक-दूसरे के फायदे पर टिकी है। श्री शी ने कहा कि आज जब दुनिया के समीकरण बदल रहे हैं, तो दोनों देशों को इस ‘ऐतिहासिक मौके’ का पूरा फायदा उठाना चाहिए।

बिजली-पानी और गैस के अलावा, दोनों नेताओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नयी टेक्नोलॉजी में भी सहयोग बढ़ाने का एलान किया। दोनों ने ‘चीन-रूस शिक्षा वर्ष’ के उद्घाटन समारोह में भी हिस्सा लिया, जिसका मकसद दोनों देशों के छात्रों और संस्कृतियों को आपस में जोड़ना है।

 

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