बिना काम कराए निकाल लिए 64 लाख; पूर्व BEO पर FIR और पेंशन रोकने की तैयारी

छतरपुर: विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) की सेवानिवृत्ति से ठीक पहले शिक्षा विभाग में लाखों रुपये की गंभीर वित्तीय अनियमितता और गबन का मामला प्रकाश में आया है। क्षेत्र के 16 शासकीय स्कूलों की मरम्मत और बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण के लिए स्वीकृत की गई कुल 64 लाख रुपये की राशि धरातल पर बिना कोई कार्य कराए कथित रूप से कागजों में ही आहरित कर ली गई। शासकीय रिकॉर्ड के विपरीत, वास्तविक रूप से इन विद्यालयों में सुधार कार्य के नाम पर एक ईंट तक नहीं लगाई गई है।
नियमों को ताक पर रखकर निकाली राशि, निविदा प्रक्रिया की भी अनदेखी विभागीय जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा शासकीय स्कूलों की स्थिति सुधारने और बच्चों को बेहतर माहौल देने के लिए प्रति स्कूल 4 लाख रुपये की राशि जारी की गई थी। आरोप है कि तत्कालीन बीईओ हिंगवासिया ने संबंधित स्कूलों के प्राचार्यों के साथ कथित रूप से सांठगांठ कर बिना कोई निर्माण या जीर्णोद्धार कार्य कराए पूरी राशि का आहरण कर लिया। इस पूरी वित्तीय प्रक्रिया में न तो अनिवार्य निविदा (टेंडर) प्रणाली का पालन किया गया और न ही कार्यालय में निर्माण कार्य से संबंधित कोई प्रामाणिक रिकॉर्ड या मूल्यांकन पुस्तिका (एमबी) उपलब्ध है।

पुरानी तारीखों में भौतिक सत्यापन का दबाव, ठेकेदार की भूमिका संदिग्धयह गंभीर मामला उजागर होने के बाद विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों में हड़कंप की स्थिति है। विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, अब इस वित्तीय हेरफेर पर पर्दा डालने और प्रशासनिक लीपापोती करने के उद्देश्य से तकनीकी इंजीनियरों पर पुरानी तारीखों (बैक डेट) में भौतिक सत्यापन की जांच रिपोर्ट तैयार करने का अनुचित दबाव बनाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, इस पूरे कथित घोटाले में राज्य स्तर के एक रसूखदार ठेकेदार की भूमिका को भी संदिग्ध माना जा रहा है, जिसकी विभागीय स्तर पर सूक्ष्मता से जांच की जा रही है।

पूर्व बीईओ का मोबाइल बंद; आपराधिक प्रकरण और पेंशन रोकने की अनुशंसाइस गंभीर वित्तीय गड़बड़ी के संबंध में जब तत्कालीन विकासखंड शिक्षा अधिकारी हिंगवासिया से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उनका आधिकारिक मोबाइल नंबर लगातार बंद प्राप्त हुआ, जिससे इन आरोपों को और बल मिल रहा है। वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में मामला आने के बाद, अब सेवानिवृत्त हो चुके बीईओ से इस राशि की शत-प्रतिशत वसूली (रिकवरी) करने की विधिक रूपरेखा तैयार की जा रही है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, यदि विस्तृत जांच में आरोपों की पुष्टि होती है, तो संबंधित की पेंशन रोकने सहित उनके विरुद्ध पुलिस में आपराधिक प्रकरण (एफआईआर) दर्ज कराने की सख्त अनुशंसा की जाएगी।

अभिभावकों और शिक्षकों में आक्रोश, टिकी प्रशासनिक कार्रवाई पर नजरशासकीय विद्यालयों की दुर्दशा और बच्चों की बुनियादी सुविधाओं के लिए आवंटित बजट में इस तरह के भ्रष्टाचार को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों, नागरिकों और शिक्षकों में भारी असंतोष व्याप्त है। नागरिकों का कहना है कि जब बच्चों के भविष्य और शिक्षा से जुड़ी राशि ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगी, तो ग्रामीण क्षेत्रों के शासकीय स्कूलों का स्तर कैसे सुधरेगा। फिलहाल, इस पूरे वित्तीय हेरफेर में संलिप्त प्राचार्यों की जवाबदेही भी तय की जा रही है और पूरे क्षेत्र की नजरें अब जिला प्रशासन की आगामी दंडात्मक कार्रवाई पर टिकी हैं।

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