नई दिल्ली | देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हुई हालिया वृद्धि ने फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स सेक्टर की चिंताओं को बढ़ा दिया है। इलारा कैपिटल की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, ईंधन के दामों में लगभग 4 फीसदी की बढ़ोतरी से कंपनियों की परिचालन लागत बढ़ गई है। यदि डिलीवरी लागत में ईंधन का हिस्सा 20 फीसदी माना जाए, तो प्रति ऑर्डर कंपनियों को लगभग ₹0.44 का अतिरिक्त नुकसान उठाना पड़ रहा है। यह स्थिति आने वाले समय में कंपनियों के मुनाफे और डिलीवरी मॉडल को प्रभावित कर सकती है।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि ईंधन की कीमतें और अधिक बढ़ती हैं, तो प्रति ऑर्डर नुकसान का आंकड़ा ₹1 से ₹1.2 तक जा सकता है। इसका सबसे बड़ा वित्तीय प्रभाव स्विगी जैसे प्लेटफॉर्म्स पर पड़ने की आशंका है, जो अभी भी क्विक कॉमर्स सेगमेंट में मजबूती बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वहीं, इटरनल जैसी कंपनियां अपने बड़े बिजनेस स्केल और प्रीमियम ग्राहक आधार के कारण इस दबाव को बेहतर ढंग से संभालने की स्थिति में हैं। हालांकि, कंपनियों के लिए एबिटा मार्जिन पर 4 से 12 फीसदी तक का नकारात्मक असर पड़ना चिंता का विषय है।
इस बढ़ते वित्तीय बोझ को संतुलित करने के लिए कंपनियां जल्द ही कुछ कड़े कदम उठा सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियां अपने नुकसान की भरपाई के लिए डिलीवरी चार्ज में बढ़ोतरी कर सकती हैं या डिलीवरी पार्टनर्स के पे-आउट में बदलाव कर सकती हैं। यदि यह चलन जारी रहा, तो इसका सीधा असर ऑनलाइन फूड और ग्रोसरी ऑर्डर करने वाले आम ग्राहकों की जेब पर पड़ना तय है। आने वाले महीनों में कंपनियां अपनी रणनीतियों में बदलाव कर सकती हैं, जिससे सेवाओं की कीमतें महंगी हो सकती हैं।

