रासलीला के माध्यम से जीव और परमात्मा के प्रेम मिलन का दिया संदेश

जबलपुर: दुर्गा मंदिर, कैलाशपुरी हाथीताल में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ सप्ताह के छठवें दिवस श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर नजर आए। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की मधुर लीलाओं, विशेष रूप से रासलीला तथा श्रीकृष्ण- रुक्मिणी विवाह प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया गया।कथावाचन करते हुए श्रीमद् जगतगुरु नरसिंह पीठाधीश्वर डॉ. नरसिंह देवाचार्य महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला केवल एक लीला नहीं, बल्कि जीव और परमात्मा के प्रेम, समर्पण और आत्मिक मिलन का प्रतीक है।

उन्होंने बताया कि जब भक्त निस्वार्थ भाव से ईश्वर का स्मरण करता है, तब भगवान स्वयं उसके जीवन में उपस्थित होकर मार्गदर्शन करते हैं। कथा में श्रीकृष्ण और रुक्मिणी विवाह प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया गया कि यह प्रसंग श्रद्धा, विश्वास और सच्चे प्रेम का संदेश देता है। भगवान के प्रति अटूट आस्था और समर्पण से जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। कथा के अंत में व्यास पीठ पूजन, आरती एवं भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ। बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया।

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