नयी दिल्ली, 19 मई (वार्ता) केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने कहा है कि जल सुरक्षा भारत के विकास पथ का केंद्र बिंदु है और ‘विकसित भारत-2047’ के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में यह एक प्रमुख स्तंभ है।
श्री पाटिल ने मंगलवार को असम के गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र बोर्ड के उच्चाधिकार प्राप्त समीक्षा बोर्ड (एचपीआरबी) की 14वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि सतत जल प्रबंधन के लिए न केवल बुनियादी ढांचा, बल्कि सुदृढ़ शासन प्रणाली, ठोस नीतियां, मजबूत संस्थाएं, तकनीकी नवाचार और सामुदायिक भागीदारी भी आवश्यक है।
बैठक में केंद्रीय मंत्री सरबानंद सोनोवाल, केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी, केंद्र सरकार तथा पूर्वोत्तर राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ और हितधारकों ने नदी बेसिन प्रबंधन पहलों की प्रगति की समीक्षा तथा ब्रह्मपुत्र बोर्ड की भावी रूपरेखा पर गहन विचार-विमर्श किया।
समीक्षा बैठक में ब्रह्मपुत्र बोर्ड द्वारा नदी बेसिन प्रबंधन, मास्टरप्लान तैयार करने, बाढ़ और कटाव प्रबंधन, जलसंभर पुनर्जीवन, डिजिटल परिवर्तन, क्षमता निर्माण तथा संस्थागत सुधारों के क्षेत्रों में की गई प्रगति की समीक्षा की गई। उच्चाधिकार प्राप्त समीक्षा बोर्ड ने पिछले दो वर्षों में एकीकृत नदी बेसिन योजना को मजबूत करने और पूर्वोत्तर क्षेत्र तथा पश्चिम बंगाल में तकनीकी सहायता गतिविधियों का विस्तार करने में बोर्ड की प्रगति की सराहना की।
बैठक में जीआईएस, रिमोट सेंसिंग, लिडार और हाइड्रोलॉजिकल मॉडलिंग जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग कर नदी बेसिन मास्टरप्लान तैयार करने और उन्हें समयानुसार अद्यतन करने पर विस्तृत चर्चा हुई। बोर्ड ने बताया कि ब्रह्मपुत्र और बराक बेसिनों को कवर करने वाले मास्टरप्लान तैयार करने और अद्यतन करने के लिए कुल 76 नदी बेसिन और उप-बेसिनों की पहचान की गई है।
इस अवसर पर श्री पाटिल ने जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा पुनर्जीवन विभाग के अंतर्गत आने वाले उत्तर पूर्वी क्षेत्रीय जल एवं भूमि प्रबंधन संस्थान (नेरीवालम) के शासी निकाय की छठी बैठक की भी अध्यक्षता की तथा नेरीवालम के नवनिर्मित अंतरराष्ट्रीय छात्रावास-सह-अतिथि गृह का वर्चुअल उद्घाटन किया।
बैठक में शासी निकाय ने संस्थान की उपलब्धियों की समीक्षा की, प्रमुख संस्थागत मामलों को मंजूरी दी और पूर्वोत्तर क्षेत्र में जल एवं भूमि प्रबंधन को मजबूत करने के लिए भविष्य की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया। शासी निकाय ने वित्तीय वर्ष 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट और लेखापरीक्षित खातों को मंजूरी दी तथा क्षमता निर्माण, अनुसंधान और शैक्षणिक गतिविधियों में नेरीवालम की निरंतर प्रगति की सराहना की।
