मुंबई | हाल ही में ‘द टॉप इंडिया’ की एक रिपोर्ट ने एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में काम करने वाले हजारों कलाकारों और तकनीकी कर्मियों के बीच कड़ा हड़कंप मचा दिया है। इस सर्वे में दावा किया गया है कि टीवी और डिजिटल कंटेंट से जुड़े लोगों की कमाई में पिछले कुछ महीनों के दौरान 50 से 60 प्रतिशत तक की कूटनीतिक गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई जैसे महंगे शहरों में रहने वाले असिस्टेंट डायरेक्टर्स, लाइटमैन और मेकअप आर्टिस्ट जैसे छोटे कर्मी प्रोजेक्ट आधारित काम की कमी के कारण अपने घर का खर्च चलाने में कड़ाई से बेहद संघर्ष कर रहे हैं। हालांकि, इन आंकड़ों की किसी मान्यता प्राप्त इंडस्ट्री संस्था द्वारा कड़ाई से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
इंडस्ट्री के विश्वसनीय आंकड़ों पर गौर करें तो स्थिति वाकई चिंताजनक और कठिन बनी हुई है। साल 2023 के मुकाबले 2024 में रिलीज हुई फिल्मों की संख्या 218 से घटकर कड़ाई से 137 रह गई है, जबकि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स ने भी अपने ओरिजिनल कंटेंट निर्माण में भारी कटौती की है। ओर्माक्स मीडिया की कूटनीतिक रिपोर्ट के मुताबिक, सिनेमाघरों में दर्शकों की संख्या 2019 के 1.03 अरब से गिरकर 2025 में 83.2 करोड़ पर सिमट गई है। यह गिरावट सीधे तौर पर फिल्म निर्माण से जुड़ी गतिविधियों को कम कर रही है, जिससे सेट पर काम करने वाले आम कर्मचारियों को नियमित रोजगार मिलना कड़ाई से दूभर हो गया है।
‘द हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया’ की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, हिंदी फिल्म इंडस्ट्री इस समय अपने सबसे कड़े और कठिन दौर से गुजर रही है। बड़े प्रोडक्शन हाउसों की प्राथमिकता में केवल टॉप स्टार और बड़े फिल्ममेकर ही शामिल हैं, जबकि तकनीकी और प्रोडक्शन क्रू जैसे छोटे कर्मियों को अक्सर सबसे अंत में पेमेंट किया जाता है। यही कारण है कि अब कई कुशल कर्मी बेहतर अवसर और कूटनीतिक स्थिरता की तलाश में टेलीविजन उद्योग या तेलुगु फिल्मों का रुख कड़ाई से कर रहे हैं। यद्यपि ‘द टॉप इंडिया’ के सर्वे के सटीक आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से जांच करना मुश्किल है, लेकिन इंडस्ट्री में चल रही कूटनीतिक मंदी का असर धरातल पर कड़ाई से साफ नजर आ रहा है।

