भोपाल। नगर निगम के नवीन भवन में कर्मचारियों के उपचार के लिए क्लीनिक शुरू तो कर दिया गया है, लेकिन डॉक्टर, दवाइयों और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में इसकी व्यवस्थाएं अधूरी नजर आ रही हैं. एक वर्ष से डॉक्टर का पद खाली होने पर भी सवाल उठ रहे हैं.
नवीन भवन में सभी विभागों की शिफ्टिंग पूरी हो चुकी है. और विभाग से संबंधित अपर आयुक्त, उपायुक्त सहित अन्य अधिकारी कर्मचारी भी बैठ कर कार्य कर रहे हैं. बस निगमायुक्त का कार्यालय शिफ्ट नहीं हो सका है. जिसका कार्य चल रहा है जो जल्द पूरा होने के बाद आयुक्त भी वहां बैठने लगेंगी. नवीन भवन के भूतल पर कर्मचारियों के उपचार हेतु क्लिनिक भी शुरू हो गया है जो पहले सदर मंजिल के पास था. इसका संचालन तो हो गया है. लेकिन व्वस्थाएं आधी अधूरी हैं एैसे मरीज का उपचार कैसे और कौन करेगा.
एक साल से डॉक्टर नहीं
नगर निगम में कई वर्षों से निगम कर्मचारियों और उनके परिजनों के उपचार के लिए स्वयं का क्लीनिक का संचालन किया जाता है जिसमें एक डॉक्टर और कुछ बेड के साथ सहायक और दवाइयों की व्यवस्था की गई थी. इससे निगम कर्मियों को आसानी उपचार मिल जाता था. उसी क्लीनिक को नवीन भवन के भूतल पर शुरू किया गया है. जिसमें डॉक्टर की पदस्थापना ही नहीं की गई. है वहां पर बैठे कर्मचारी ने बताया कि यहा पर डॉक्टर का पद विगत एक वर्ष से खाली है. एक वर्ष पहले यहां पर महिला डॉक्टर नायर की पदस्थापना थी जिनको अब कहीं और पदस्थ कर दिया गया है. उसके बाद से क्लीनिक में डॉक्टर का पद खाली है.
बेड पर गद्दे नहीं
क्लीनिक के संचालन को भी लगभग एक सप्ताह से अधिक हो गया. जिंसमे दो पलंग रखे गये हैं. पर पलंग पर ना ही गद्दे बिछाए गए हैं. जब गद्दे नहीं है तो चादर तकिया और मरीज को ओढ्ने के लिए कंबल भी कहां से होंगे. अब एैसी स्थिति में अगर कोई कर्मचारी अचानक बीमार हो जाए तो उसे कहां पर उपचार देंगे.
दवाईयां भी नहीं
वहां पर बैठे कर्मचारी से जब दवाईयों को लेकर बात की गई तो उसने बताया कि यहां अभी कोई व्यवस्था दवाइयों की नहीं है. इतनी कमियां होने के बाद निगम के अधिकारियों ने इस क्लीनिक का शुभारंभ क्यों किया? और डॉक्टर का पद एक वर्ष से खाली है तो इसे भरा क्यों नहीं गया.
इनका कहना है
नवीन भवन में क्लीनिक नहीं एक अस्पताल बनाया है जिससे आपातकालीन समय में कर्मचारियों का उपचार हो सके.नई व्यवस्था बनाई है. हम प्रयास करेंगे कोई ना कोई डॉक्टर को बिठा सके. पुराने शहर में क्लीनिक था वहां पर कोई भी कर्मचारी उपचार कराने नहीं जाता था इसलिए डॉक्टर की नियुक्ति नहीं की गई थी. अब सब व्यवस्था की जाएंगी.
मालती राय, महापौर, नगर निगम भोपाल
