ओस्लो 19 मई (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत और नार्वे के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की अपार संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा है कि नॉर्वे की कंपनियों के लिए भारत के दरवाजे खुले हैं और उन्हें स्वच्छ ऊर्जा, जहाज निर्माण, समुद्री उद्योगों और स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी में निवेश के लिए आगे आना चाहिए।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के पास खाद्य सुरक्षा, उर्वरक, मत्स्य पालन और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग के उत्कृष्ट अवसर हैं।
नार्वे की दो दिन की यात्रा पर गये श्री मोदी ने सोमवार रात भारत-नॉर्वे व्यापार और अनुसंधान शिखर सम्मेलन को संबोधित किया।
प्रधानमंत्री ने बाद में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि व्यापार क्षेत्र और अनुसंधान जगत से जुड़े हितधारकों के साथ संवाद करना एक सुखद अवसर था।
उन्होंने कहा ,” ओस्लो सिटी हॉल में प्रधानमंत्री जोनास गाहर स्टोरे और मैंने एक व्यापार एवं अनुसंधान शिखर सम्मेलन में भाग लिया। व्यापार क्षेत्र और अनुसंधान जगत से जुड़े हितधारकों के साथ संवाद करना एक सुखद अवसर था। हमारे देशों के पास खाद्य सुरक्षा, उर्वरक, मत्स्य पालन और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग के उत्कृष्ट अवसर हैं। मैंने नॉर्वे को भारत की स्वच्छ ऊर्जा पहलों में निवेश के लिए आमंत्रित किया। मैंने भारत के सुधार एजेंडा के समर्थन में भी अपने विचार रखे। जहाज निर्माण एक ऐसा क्षेत्र है जो व्यापक और असीम संभावनाएं प्रदान करता है।”
श्री मोदी ने भारत और नॉर्वे के बीच मजबूत आर्थिक सहयोग का आह्वान करते हुए नॉर्वे की कंपनियों को स्वच्छ ऊर्जा, जहाज निर्माण, समुद्री उद्योगों और स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी में निवेश बढ़ाने के लिए कहा।
शिखर सम्मेलन में नॉर्वे के क्राउन प्रिंस हाकोन के अलावा 50 से अधिक कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ-साथ दोनों देशों के व्यापार और अनुसंधान क्षेत्रों के 250 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए।
यह आयोजन भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) के लागू होने के बाद भारत-नॉर्वे संबंधों में बढ़ती गति को दर्शाता है।
श्री मोदी ने भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था पर प्रकाश डाला और दोनों देशों के हितधारकों से व्यापार समझौते के तहत निर्धारित महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में कार्य करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा, “दोनों पक्षों के हितधारकों को टीईपीए के तहत 100 अरब डॉलर के निवेश लक्ष्य तथा भारत में 10 लाख रोजगार सृजन के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए प्रयास करने चाहिए।”
प्रधानमंत्री ने भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि, अनुकूल जनसांख्यिकी और निवेशक-अनुकूल नीतियों पर जोर देते हुए देश को वैश्विक निवेश के लिए एक आकर्षक गंतव्य बताया। उन्होंने नॉर्वे को समुद्री अर्थव्यवस्था, नवीकरणीय ऊर्जा, हरित परिवर्तन, महत्वपूर्ण खनिज, नवप्रवर्तन उद्यमों और जहाज निर्माण जैसे क्षेत्रों में अधिक भागीदारी के लिए आमंत्रित किया, साथ ही सतत विकास और जलवायु कार्रवाई के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया।
श्री मोदी ने कहा, “भारत का विशाल आकार, बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताएं और जलवायु प्रतिबद्धताएं नवीकरणीय ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन और स्वच्छ ऊर्जा अवसंरचना के तीव्र विस्तार को बढ़ावा दे रही हैं।” उन्होंने समुद्री क्षेत्र के कार्बन उत्सर्जन में कमी, महासागर स्थिरता और जलवायु वित्त में नॉर्वे की विशेषज्ञता की भी सराहना की।
प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के व्यवसायों को नई साझेदारी बनाने और आर्थिक संबंधों को गहरा करने के लिए उभरते अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया। शिखर सम्मेलन के दौरान भारतीय और नार्वे की कंपनियों तथा संस्थानों के बीच कई समझौतों पर हस्ताक्षर भी किए गए।
इससे पहले दिन में, ओस्लो में चार गोलमेज चर्चाएंआयोजित की गईं, जिनमें स्वास्थ्य सेवा नवाचार, समुद्री सहयोग, बैटरी और ऊर्जा भंडारण प्रणाली, डिजिटलीकरण और विद्युतीकरण तथा पवन ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित किया गया।
