भीषण गर्मी में प्यास बुझाने के लिए यात्रियों में गुत्थम-गुत्था

सतना : भीषण गर्मी के इस दौर में जहां पल-पल यात्रियों का गला सूखता रहता है. जिसके चलते ट्रेन के प्लेटफार्म पर रुकते ही वे भागते हुए नल के प्वाइंट्स पर पहुंचते हैं. लेकिन यात्रियों को तब मायूसी हाथ लगती है जब नल पानी के बजाए गर्म हवा फेंकते दिखाई देते हैं. वहीं यदि इक्का-दुक्का प्वाइंट्स पर पानी नसीब भी हो जाए तो उसे पीने के लिए यात्रियों के बीच गुत्थम-गुत्था शुरु हो जाती है. वहीं जिस यात्री को पानी नहीं मिल पाता उसे मजबूरन अपनी जेब ढीली कर बोतलबंद पानी खरीदना पड़ता है.सतना रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म क्र. 1 पर आधा दर्जन स्थानों पर डेढ़ दर्जन नल के प्वाइंट्स बने हुए हैं.

इसी कड़ी में प्लेटफार्म क्र. 2 और 3 के बीच भी 8 स्थानों पर 2 दर्जन नल के प्वांइट्स बने हुए हैं. जिनमें से आधे स्थानों पर वाटर कूलर भी सुविधा उपलब्ध कराई गई है. लेकिन समस्या यह है कि भीषण गर्मी का मौसम शुरु होने पर जैसे ही यात्रियों के बीच पानी की मांग बढ़ती है वैसे ही नल के प्वाइंट्स नकारा साबित होने लगते हैं. यह समस्या तब और बढ़ जाती है जब कोई ट्रेन प्लेटफार्म पर पहुंचती है. इन दिनों गर्मियों की छुट्टी की वजह से यात्री ट्रेनों में जबरदस्त भीड़ सफर कर रही है.

जिसके चलते किसी भी ट्रेन के प्लेटफार्म पर पहुंचते ही यात्रियों का हुजूम पल के प्वाइंटस् की आरे सरपट भागता है. लेकिन यात्रियों के हाथ तब मायूसी लगती है जब नल के प्वाइंट्स पानी देने के बजाए गर्म हवा फेंकने लगते हैं. इस दौरान जैसे ही किसी इक्का-दुक्का प्वांट्स पर पानी उपलब्ध नजर आता है वैसे ही यात्रियों का हुजूम वहां पर एकत्र हो जाता है. जिसके बाद शुरु हो जाता है सूखे कंठ को बुझाने की जद्दोजहत का सिलसिला. नजीतजन यात्रियों के बीच वाद-विवाद से लेकर गुत्थम-गुत्था तक की नौबत आए दिन देखने को मिलती है.

अधिकांश लंबी दूरी की ट्रेनों का सतना में स्टॉपेज महज 5 मिनट का होता है. लिहाजा इसी दरमियान ट्रेन में सवार अधिकांश यात्री पानी पीने के साथ ही उसे अपनी बोतल में भर लेना चाहते हैं. लेकिन पेयजल को लेकर सतना रेलवे स्टेशन पर व्याप्त अव्यस्था उन्हें प्यासे रहने को मजबूर कर देती है. रहीं बात रेलवे प्लेटफार्म पर लगी वाटर वेण्डिंग मशीन की तो वहां पर भी भीड़ का फायदा उठाते हुए मनमाना दाम वसूल लिया जाता है.
वेण्डरों से मिली-भगत के आरोप
भीषण गर्मी में रेलवे स्टेशनों पर बोतल बंद पानी की मांग कई गुना अधिक बढ़ जाती है. इस बढ़ी हुई मांग का फायदा उठाने के लिए कई अवैध वेण्डर भी सक्रिय हो जाते हैं, जो रेलवे द्वारा अधिकृत पानी की बोतलों को बेचने के बजाए गुमनाम ब्राण्ड्स की पानी की बोतलें बेचने लगते हैं. बताया जाता है कि कुछ वेण्डरों द्वारा गुपचुप तरीके से कुछ रेल कर्मियों से सांठ-गांठ कर ली जाती है. नतीजतन प्लेटफार्म पर भीड़ होते ही नल के प्वाइंट्स नकारा हो जाते हैं. जिसके चलते यात्रियों को मजबूरी में मंहगी और गुणवत्ताहीन पानी की बोतलें खरीदकर प्यास बुझाने के लिए मजबूर होना पड़ता है

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