
जबलपुर। हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति में भी आरक्षण की मांग उठी है। ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने इस सिलसिले में राष्ट्रपति, सीजेआई, कानून मंत्रालय व हाईकोर्ट के सीजे को पत्र भेजा है। जिसमें कहा गया है कि मप्र हाई कोर्ट के स्थापना काल 1956 से लेकर आज तक अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग से एक भी हाईकोर्ट जज की नियुक्ति नहीं हुई है।
जबकि अन्य पिछड़़ा वर्ग से अपवाद के रूप में पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत की सौगत मिली। हालांकि वे भी दिल्ली हाईकोर्ट से स्थानांतरित होकर मप्र हाई कोर्ट आए थे। आरक्षित वर्ग की उच्च न्यायपालिका में सहभागिता की इस स्थिति को लेकर ओबीसी एडवोकेट्स वेल्फेयर एसोसिएशन ने इन वर्गों के अधिवक्ताओं को हाईकोर्ट जज के रूप में नामांकित करने की आवश्यकता पर बल दिया है। इसके साथ ही महिलाओं को भी स्थान दिए जाने का बिंदु पत्र में शामिल किया गया है। एसोसिएशन से जुड़े वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने बताया कि मप्र में अनुसूचित जाति वर्ग की आबादी 16 प्रतिशत, अनुसूचित जनजति जाति वर्ग की 21 प्रतिशत व अन्य पिछड़े वर्ग की आबादी 51 प्रतिशत है। जबकि महिलाओं की आबादी 48.3 प्रतिशत है। लिहाजा, कुल 85 प्रतिशत वाले इन वर्गों के योग्य अधिवक्ताओं को हाईकोर्ट जज बनने का अवसर मिलना चाहिए। सामाजिक न्याय की दृष्टि से ऐसा किया जाना सराहनीय होगा।
