वॉशिंगटन/ तेहरान, 18 मई (वार्ता) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि कि ईरान उनके साथ शांति समझौता करने के लिए ‘मरा जा रहा है’ जबकि ईरान से आ रही खबरें संकेत दे रही हैं कि अमेरिका बातचीत चलने तक ईरानी तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी रूप से ढील देने पर सहमत हो गया है।
दोनों पक्षों के बीच इस बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान के जरिये प्रस्तावों का आदान-प्रदान हुआ है। फॉर्च्यून पत्रिका के सोमवार को प्रकाशित साक्षात्कार में श्री ट्रंप ने ईरान पर अमेरिका के साथ बातचीत में बनी सहमतियों से पीछे हटने का आरोप लगाया।
श्री ट्रंप ने कहा, “ वे हर समय चिल्लाते रहते हैं। मैं आपको एक बात बता सकता हूं, वे (समझौते पर) हस्ताक्षर करने के लिए मरे जा रहे हैं। वे समझौता करते हैं और फिर एक ऐसा दस्तावेज भेज देते हैं, जिसका आपकी ओर से किये गये समझौते से कोई लेना-देना ही नहीं होता। मैं कहता हूं, ‘क्या तुम लोग पागल हो’ ? ”
यह साक्षात्कार फॉर्च्यून पत्रिका में प्रकाशित होने के तुरंत बाद ईरान की तस्नीम न्यूज़ एजेंसी ने खबर दी कि अमेरिका ने बातचीत की अवधि के दौरान ईरानी तेल निर्यात पर से प्रतिबंध हटाने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। तनाव कम करने के प्रयासों के बीच इसे बड़ी रियायत के रूप में देखा जा सकता है।
तस्नीम ने ईरानी वार्ता दल के करीबी स्रोत के हवाले से रिपोर्ट की है, “अमेरिका का नया प्रस्ताव पिछले मसौदों से इस मायने में अलग है कि इसमें अंतिम समझौता होने तक ईरान के तेल व्यापार से जुड़े प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से निलंबित करने की अनुमति दी गयी है।”
रिपोर्ट में कहा गया कि प्रस्तावित राहत के तहत अमेरिकी विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (ओएफएसी) के लगाये गये प्रतिबंधों से छूट दी जायेगी। इससे बातचीत की अवधि के दौरान ईरान सीमित मात्रा में तेल का निर्यात कर सकेगा।
ईरान हालांकि लगातार इस बात पर अड़ा हुआ है कि अमेरिका के साथ किसी भी अंतिम समझौते में प्रतिबंधों को पूरी तरह से हटाना शामिल होना चाहिए।ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि ईरान ने संभावित समझौते को लेकर हाल ही के अमेरिकी प्रस्तावों और संशोधनों पर अपना जवाब औपचारिक रूप से भेज दिया है।
श्री बघाई ने कहा कि हालांकि अमेरिका ने शुरुआत में ईरान के प्रस्ताव को सीधे खारिज कर दिया था, लेकिन बाद में ईरान को पाकिस्तान के जरिये अतिरिक्त प्रस्ताव मिले, जो इस बातचीत की प्रक्रिया में मध्यस्थ है। फॉर्च्यून पत्रिका को दिये साक्षात्कार में श्री ट्रंप ने यह भी स्वीकार किया कि ईरान के साथ संघर्ष और वैश्विक स्तर पर तेल की बढ़ती कीमतें मुद्रास्फीति (महंगाई) के खिलाफ अमेरिकी प्रशासन की लड़ाई को जटिल बना रही हैं और इससे फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों में की जाने वाली आगामी कटौतियों में देरी हो सकती है। ईरान संघर्ष से पैदा हुई आर्थिक अनिश्चितता और ऊर्जा बाजारों में उतार-चढ़ाव का जिक्र करते हुए श्री ट्रंप ने फॉर्च्यून से कहा, “जब तक युद्ध खत्म नहीं हो जाता, तब तक आप वास्तव में आंकड़ों का आकलन नहीं कर सकते।”
इन भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद श्री ट्रंप ने अमेरिकी शेयर बाजारों के रिकॉर्ड स्तर पर होने और कंपनियों की मजबूत कमाई का हवाला देते हुए तर्क दिया कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था लचीली और मजबूत बनी हुई है।
इसी साक्षात्कार में श्री ट्रंप ने चिप बनाने वाली कंपनी इंटेल में अमेरिकी सरकार के निवेश का बचाव करते हुए कहा कि पिछले साल लगभग 10 अरब डॉलर के औद्योगिक सहायता पैकेज के हिस्से के रूप में प्रशासन से हासिल की गयी 10 फीसदी हिस्सेदारी से अधिक की मांग उन्हें करनी चाहिए थी।
खबरों के मुताबिक, अमेरिकी सरकार की इंटेल में इस हिस्सेदारी का मूल्य अब बढ़कर 50 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है।
श्री ट्रंप ने कहा, “ क्या मुझे इसका श्रेय मिलता है? क्या कोई जानता भी है कि यह मैंने किया था? ”
उन्होंने कहा कि अमेरिका को इंटेल को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बहुत पहले ही बचाना चाहिए था। टीएसएमसी का जिक्र करते हुए श्री ट्रंप ने कहा कि अगर आयातित चिप्स पर पहले ही टैरिफ (शुल्क) लगा दिया गया होता, तो इंटेल वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार पर अपना दबदबा बना सकती थी।
उन्होंने कहा, “अगर मैं उस समय राष्ट्रपति होता जब इन सभी कंपनियों ने चीन से अपनी चिप्स भेजनी शुरू की थीं तो मैं ऐसा टैरिफ लगा देता, जिससे इंटेल सुरक्षित रहती।”
