पेरिस, 18 मई (वार्ता) जी-7 देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के प्रमुखों ने सोमवार को फ्रांस में दो दिवसीय बैठक में ईरान युद्ध के बाद ऊर्जा और आपूर्ति शृंखलाओं में आये व्यवधान के कारण बढ़ते सार्वजनिक ऋण, अस्थिर बॉन्ड बाजारों और वैश्विक आर्थिक दुष्प्रभावों पर चर्चा की
एवियन में हो रही यह दो दिवसीय बैठक जी7 की बारी-बारी से मिलने वाली अध्यक्षता के तहत आयोजित की जा रही है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब निवेशकों को डर है कि ऊर्जा की ऊंची कीमतें मुद्रास्फीति (महंगाई) को बढ़ा सकती हैं और वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों में और बढ़ोतरी का कारण बन सकती हैं।
अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट ने कहा कि इस शिखर सम्मेलन में आतंकवाद के वित्तपोषण और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति पर भी चर्चा की जायेगी। बैठक से पहले पत्रकारों से बात करते हुए श्री बेसेन्ट ने कहा, “हम यहां वैश्विक अर्थव्यवस्था, वैश्विक असंतुलन, महत्वपूर्ण खनिजों और आतंकवाद के वित्तपोषण पर चर्चा करने के लिए एकत्र हुए हैं।”
इस दो दिवसीय बैठक में अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान के वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंक के अधिकारी भाग ले रहे हैं। फ्रांस को उम्मीद है कि इस विचार-विमर्श से वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने आने वाली चुनौतियों पर कम से कम एक साझा समझ विकसित हो सकेगी। फ्रांस के अर्थव्यवस्था एवं वित्त मंत्री रोलैंड लेस्क्योर ने अमेरिका के बड़े बजटीय घाटे, यूरोप के कमजोर नवाचार प्रदर्शन और औद्योगिक अति-क्षमता के साथ-साथ चीन की सुस्त खपत का हवाला देते हुए कहा, “पिछले दशक में वैश्विक अर्थव्यवस्था जिस तरह से आगे बढ़ी है, वह स्पष्ट रूप से टिकाऊ नहीं है।”
यह बातचीत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा के तुरंत बाद हो रही है, जो 2017 के बाद किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की पहली चीन यात्रा है। यह यात्रा ऐसे समय में हुई है, जब पश्चिमी देशों की राजधानियों में बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा प्रणालियों के लिए आवश्यक ‘दुर्लभ मृदा तत्वों’ और अन्य रणनीतिक खनिजों के लिए चीन पर निर्भरता को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।
श्री लेस्क्योर के अनुसार, जी-7 देशों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दुर्लभ मृदा तत्वों की आपूर्ति के लिए कोई भी देश किसी एक देश पर निर्भर न रहे। इस बात को ध्यान में रखा गया है कि इन सामग्रियों के खनन और प्रसंस्करण में दबदबा रखने वाले चीन ने पहले भी इनके निर्यात पर प्रतिबंध लगाये हैं या कीमतों को प्रभावित करने के लिए बाजार में अपनी स्थिति का इस्तेमाल किया है।
फ्रांसिसी वित्त मंत्रालय के अनुसार, इस बैठक में जी-7 देशों के केंद्रीय बैंकों के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। इसमें इस बात की समीक्षा की जायेगी कि सरकारें अस्थायी, लक्षित और वापस किये जा सकने वाले उपायों के जरिये मुद्रास्फीति (महंगाई) जैसे आर्थिक झटकों से निपटने के लिए किस तरह आपस में तालमेल बिठा सकती हैं।
जर्मनी के केंद्रीय बैंक के प्रमुख जोआचिम नागेल ने कहा कि नीति निर्माता बाजारों को शांत करने और विश्वास बहाल करने के लिए अब भी जरूरी कदम उठा सकते हैं।
