बेरडी में पंढरीनाथ मंदिर मार्ग विवाद, आक्रोश के बाद मंदिर समिति और ग्रामीणों ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन ​

सौसर:मिनी पंढरपुर के नाम से विख्यात ग्राम बेरडी के ऐतिहासिक श्री पंढरीनाथ मंदिर मार्ग विवाद ने अब तुल पकड़ लिया है। शनिवार को उपजे भारी आक्रोश के बाद, आज सोमवार को वारकरी संप्रदाय के श्रद्धालुओं, मंदिर समिति और हजारों ग्रामीणों ने सौसर एसडीएम को एक ज्ञापन सौंपकर अस्थाई समाधान की मांग की है। ज्ञापन सौंपने के दौरान तहसील कार्यालय परिसर में भारी संख्या में श्रद्धालु और क्षेत्र के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
सुगम दर्शन के लिए प्रतिवर्ष भूमि अधिग्रहण की मांग
​एसडीएम को सौंपे गए ज्ञापन में श्रद्धालुओं और ग्रामीणों ने मुख्य रूप से मांग की है कि प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले अखंड हरिनाम सप्ताह के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के सुगम दर्शन और सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखा जाए। इसके लिए मंदिर के निर्गमन मार्ग से लेकर नरेंद्र चांडक की भूमि होते हुए बेरड़ी-लोधीखेड़ा मार्ग तक के 50 फीट चौड़े रास्ते का प्रशासन द्वारा प्रतिवर्ष अस्थाई रूप से अनिवार्य अधिग्रहण किया जाए, ताकि इतनी बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को आवाजाही में कोई असुविधा न हो।
क्या है पूरा मामला
​उल्लेखनीय है कि बेरडी स्थित सौ वर्ष पुराने प्राचीन श्री पंढरीनाथ मंदिर के पश्चिम दिशा के मुख्य प्रवेश द्वार और वर्षों से उपयोग में लाए जा रहे मार्ग को बंद करने का प्रयास किया गया था। शनिवार की सुबह जैसे ही यह बात फैली, समूचे क्षेत्र के श्रद्धालुओं की भावनाएं भड़क उठीं और उन्होंने मंदिर परिसर में इकट्ठा होकर कड़ा विरोध प्रदर्शन किया था। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल जमीन या रास्ते का विवाद नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की आत्मा और लाखों हिंदुओं की धार्मिक आस्था व सनातन परंपराओं से जुड़ा संवेदनशील मामला है।
पूर्व में मंदिर समिति ने की थी सौहार्दपूर्ण पहल
​ग्रामीणों के अनुसार, मंदिर समिति ने इस विवाद को टालने के लिए संबंधित भूमि स्वामियों से कई बार सौहार्दपूर्ण चर्चा की थी। जनहित को सर्वोपरि रखते हुए समिति ने उक्त भूमि को उचित मूल्य पर खरीदने या उसके बदले में दूसरी जगह उतनी ही भूमि देने की पेशकश भी की थी, ताकि विवाद का शांतिपूर्ण हल निकल सके। लेकिन इस बीच भूमि स्वामियों द्वारा मंदिर पक्ष के विरुद्ध पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने की बात सामने आने के बाद श्रद्धालुओं का आक्रोश और अधिक गहरा गया।
हजारों की संख्या में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
​आज सोमवार को सौसर
पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में न केवल बेरडी बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों से आए वारकरी संप्रदाय के भक्त, प्रबुद्ध नागरिक और महिलाएं बड़ी संख्या में शामिल थीं। ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन को बताया गया है कि यदि इस मार्ग को स्थाई रूप से सुरक्षित नहीं किया गया, तो प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले धार्मिक अनुष्ठान (जिसमें लगभग चार लाख श्रद्धालु जुटते हैं) के समय कानून-व्यवस्था और जनसुरक्षा का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। प्रशासन ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए उचित वैधानिक कार्रवाई और जांच का आश्वासन दिया है।

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