राष्ट्रवाद के भाव से आचरण ही भाजपा कार्यकर्ता की पहचान-योगी आदित्यनाथ

गोरखपुर, 17 मई (वार्ता) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि राष्ट्रवाद के भाव से आचरण ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कार्यकर्ता की पहचान है।

श्री योगी रविवार को गोरखपुर के सहजनवा विधानसभा क्षेत्र स्थित तेनुआ टोल प्लाजा के समीप एक रिजॉर्ट में भाजपा के जिला प्रशिक्षण वर्ग के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भाजपा का कार्यकर्ता पार्टी के संस्थापकों के मूल्यों और आदर्शों पर चलते हुए देश की एकता और अखंडता के लिए शुचिता और पारदर्शिता से आचरण और तदनुरूप कार्य करता है।

उन्होंने कहा कि समाज कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा), राष्ट्रीय जनता दल (राजद), तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), डीएमके या ऐसे ही भ्रष्टाचार में डूबे अन्य दलों के आचरण को सम्मान नहीं देता है, भाजपा कार्यकर्ता को समाज में सम्मान इसलिए मिलता है कि इस पार्टी कार्यकर्ता के आचरण में राष्ट्रवाद और भारतीयता का आचरण मिलता।

मुख्यमंत्री ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाभियान 2026 के अंतर्गत पार्टी की जिला इकाई की तरफ से आयोजित इस प्रशिक्षण वर्ग में शामिल प्रतिभागियों को ‘राष्ट्र प्रथम’ के भाव से अनवरत आगे बढ़ते रहने को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा, संस्कृति, सुशासन और समृद्धि को जोड़ने का काम करने वाली भाजपा इकलौती पार्टी है। केंद्र और भाजपा की राज्य सरकारों ने इसी को अपने कार्यक्रमों का आधार बनाया है।

उन्होंने ‘भाजपा का इतिहास और विकास’ विषय पर केंद्रित जिला प्रशिक्षण वर्ग के उद्घाटन सत्र में कहा कि स्थापना के 50 वर्ष से भी कम समय में भाजपा ने दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक दल के रूप में केंद्र और देश के 22 राज्यों में राष्ट्रवाद की विचारधारा को लागू करने के अभियान को आगे बढ़ाया है। भाजपा देश ही नहीं दुनिया का एकमात्र राजनीतिक दल है जिसने हमेशा और मजबूती से यह घोषणा की है कि राष्ट्र प्रथम, दल द्वितीय और व्यक्ति का हित अंतिम होना चाहिए।

श्री योगी ने कहा कि राष्ट्र प्रथम के भाव से पार्टी के संस्थापकों ने जो मूल्य, आदर्श और संस्कार दिए हैं, उन्हीं का अनुसरण करते हुए कार्यकर्ता जब राष्ट्रवाद की बात करते हैं तो देश ही नहीं दुनिया के भारतवंशियों के सामने पार्टी के रूप में सिर्फ भाजपा का ही चेहरा और कमल का फूल चुनाव निशान सामने होता है।

उन्होंने कहा कि 26 नवंबर 1949 को भारत का संविधान निर्मित हुआ और 26 जनवरी 1950 को भारत ने अपना संविधान अंगीकार किया। देश मे संसदीय प्रणाली लागू हुई पर, अभी पहला आम चुनाव भी नहीं हुआ कि कांग्रेस ने तुष्टिकरण के जिन कारणों से देश का विभाजन हुआ था, उसे ही फिर से भारत की राजनीति का हिस्सा बनाना प्रारंभ कर दिया। अभी संविधान ठीक ढंग से लागू होना प्रारंभ ही नहीं हुआ कि कांग्रेस ने तुष्टिकरण का खेल प्रारंभ किया।

श्री योगी ने कहा कि तब राष्ट्रीय स्वयं सेवकसंघ को लगा कि एक ऐसा दल गठित करना चाहिए जो भारत की राष्ट्रीयता और बेहतर भविष्य के लिए कार्ययोजना बनाने में योगदान दे सके। तब भारत सरकार के मंत्री पद से इस्तीफा देकर देश के लिए लड़ने वाले, वीर बलिदानी, महान शिक्षाविद डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को भारतीय जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में यह जिम्मेदारी दी गई।

 

 

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