मुंबई | भारत में डिजिटल प्रेशियस मेटल्स (सोना-चांदी) सेक्टर को अधिक संगठित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए उद्योग के प्रमुख प्लेटफॉर्म्स ने मिलकर ‘डिजिटल प्रेशियस मेटल्स एश्योरेंस काउंसिल ऑफ इंडिया’ (DPMACI) नामक एक नए सेल्फ-रेगुलेटरी ऑर्गनाइजेशन (SRO) का गठन किया है। इस ऐतिहासिक कदम को देश भर के डिजिटल गोल्ड निवेशकों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। नीति विशेषज्ञ सुश्री निरुपमा सुंदरराजन को इस नवगठित संगठन की स्वतंत्र चेयरपर्सन नियुक्त किया गया है। डीपीएमएसीआई का मुख्य उद्देश्य पूरे सेक्टर के लिए एक समान आचार संहिता (कोड ऑफ कंडक्ट) तैयार करना है, जिससे धोखाधड़ी की गुंजाइश खत्म होगी और उपभोक्ता सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।
इस नए सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए देश के कई बड़े बुलियन ब्रांड्स जैसे एमएमटीसी-पीएएमपी, सेफगोल्ड और ऑगमोंट के साथ-साथ फोनपे, भारतपे, मोबिक्विक, क्रेड और गुल्लक जैसे प्रमुख फिनटेक प्लेटफॉर्म्स भी एक साथ आए हैं। इस संगठन द्वारा प्रस्तावित फ्रेमवर्क की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ग्राहकों द्वारा खरीदे गए हर डिजिटल गोल्ड या सिल्वर के पीछे एक-से-एक के अनुपात में वास्तविक (फिजिकल) सोना या चांदी सुरक्षित वॉल्ट्स में मौजूद रहेगी। इस पूरी व्यवस्था की नियमित रूप से स्वतंत्र कस्टोडियन द्वारा ऑडिट की जाएगी, जिससे निवेशकों की होल्डिंग पूरी तरह सुरक्षित और प्रमाणित रहेगी।
भविष्य के वित्तीय जोखिमों से निपटने के लिए इस संगठन ने एक अभेद्य कस्टडी और ट्रस्ट मॉडल तैयार किया है। इसके तहत अगर कोई डिजिटल प्लेटफॉर्म कभी दिवालिया या वित्तीय संकट का शिकार होता है, तब भी ग्राहकों का फंड और सोना पूरी तरह सुरक्षित रहेगा क्योंकि उन्हें सेग्रेगेटेड (अलग) खातों में ट्रस्टी की देखरेख में रखा जाएगा। इसके अलावा, उपभोक्ताओं की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए एक ओम्बड्समैन सिस्टम (लोकपाल व्यवस्था) और शिकायत निवारण तंत्र विकसित किया जा रहा है। कूटनीतिक और अंतरराष्ट्रीय मानकों जैसे लंदन व यूएई गुड डिलीवरी मानकों को अपनाने तथा पारदर्शिता के लिए जल्द ही एक आधिकारिक वेब पोर्टल भी लॉन्च किया जाएगा।

