24 घंटे कड़ा पहरा, हर दिन डॉक्टरों का चेकअप… सलामतपुर के इस पेड़ को क्यों मिली है Z+ सिक्योरिटी?

अदनान खान सलामतपुर। जिला मुख्यालय रायसेन से लगभग 18 किलोमीटर दूर सलामतपुर के पास सांची बौद्ध यूनिवर्सिटी में स्थित है भारत का सबसे वीआईपी पेड़, यह कोई आम पेड़ नहीं बल्कि एक ऐसा पीपल का पेड़ है जिसकी सुरक्षा में एक चार के गार्ड हमेशा मौजूद रहते हैं। और इस पेड़ का एक पत्ता भी अगर सूख जाए तो प्रशासन की रातों की नींद उड़ जाती है। जी हां हम भारत के सबसे वीआईपी पेड़ के बारे में बात कर रहे हैं। आपको बता दे कि इस पेड़ कि छोटी छोटी शाखाएं सन 2012 में श्रीलंका के तत्कालीन राष्ट्रपति महेंद्रा राजपक्षे द्वारा लाकर मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को दिया गया था। और इस पेड़ को 21 सितंबर 2012 को एक सुनसान पहाड़ी पर लगाया गया था।तब से लेकर आज तक इस पेड़ की सुरक्षा की जिम्मेदारी एक चार के गार्ड के हवाले रहती है। इसलिए वहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता। और तो और इस पेड़ के स्वास्थ्य की जांच करने डॉक्टर रोज पहुंचते हैं। तो वहीं नगर परिषद सांची द्वारा सुबह शाम दोनों समय इस पीपल के पेड़ में पानी दिया जाता है।

इस पेड़ के नीचे बैठकर गौतम बुद्ध ने प्राप्त किया था ज्ञान– यह कोई मामूली पेड़ नहीं है कहा जाता है कि यह उसे पेड़ का हिस्सा है जिस पेड़ के नीचे बैठकर भगवान बुद्ध को गया जी में ज्ञान प्राप्त हुआ था। इसी कारण इस पेड़ का अलग ही महत्व है और इसकी सुरक्षा विशेष रूप से की जाती है।इस पेड़ को देखने के लिए दूर-दूर से टूरिस्ट यहां आते हैं और इस पेड़ के साथ अपनी सेल्फी लेकर जाते हैं। वहीं भोपाल से आए रेहान खान बताते है कि उन्होंने इस पेड़ के बारे में बहुत कुछ सुन रखा था आज देखने को मिला बहुत अच्छा लगा कि ये उस पेड़ का शाखाएं है जिस पेड़ के नीचे बैठकर भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था। वहीं रोहित यादव कहते हैं कि इस पेड़ को देखकर बहुत अच्छा लगा और हमारे लिए यह गौरव की बात है कि यह पेड़ उस पेड़ का हिस्सा है जहां भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था। इसलिए इसको देखने आए थे और यहां पर सुरक्षा के बड़े इंतजाम किए गए हैं और बड़ी-बड़ी जालियां लगाई गई हैं ताकि कोई भी इस पेड़ को नुकसान भी ना पहुंच पाए। और इसी कारण शायद इसको भारत का सबसे वीआईपी पेड़ कहा जाता है।
इनका कहना है।

यह उस पेड़ का हिस्सा है जिसके नीचे बैठकर भगवान बुद्ध को बोध गया जी में ज्ञान प्राप्त हुआ था,फिर उसके बाद उसकी शाखाओं को श्रीलंका ले जाया गया और उसके बाद श्रीलंका से सन 2012 (14 साल पहले ) यहां लगाया गया था।पीपल के पेड़ का हिंदू धर्म में वैसे भी बहुत महत्व होता है और कहा जाता है कि इसमें भगवान वास करते हैं यही कारण है कि इस पेड़ का अत्यधिक महत्व है और इसकी देखभाल वीआईपी तरह से की जाती है।
मनीष शर्मा, एसडीम रायसेन।

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