नई दिल्ली | भारतीय बैंकिंग इतिहास में अब तक के सबसे बड़े प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को केंद्र सरकार की हरी झंडी मिल गई है। वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले वित्तीय सेवा विभाग (DFS) ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दूसरे सबसे बड़े बैंक, ‘एमिरेट्स एनबीडी’ (Emirates NBD) को भारत के निजी क्षेत्र के आरबीएल बैंक (RBL Bank) में 74 प्रतिशत तक बहुलांश हिस्सेदारी खरीदने की औपचारिक मंजूरी दे दी है। इस रणनीतिक और ऐतिहासिक फैसले से देश के बैंकिंग सेक्टर में लगभग 26,850 करोड़ रुपये (3 अरब अमेरिकी डॉलर) के नए विदेशी पूंजी निवेश का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। खास बात यह है कि वित्त मंत्रालय की यह महत्वपूर्ण मंजूरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूएई यात्रा से ठीक एक दिन पहले आई है, जो दोनों देशों के मजबूत होते आर्थिक संबंधों को दर्शाती है।
इस बड़े सौदे के तहत एमिरेट्स एनबीडी तरजीही निर्गम (प्रिफरेंशियल इश्यू) के माध्यम से आरबीएल बैंक के कुल 95,90,45,636 पूर्ण चुकता इक्विटी शेयर खरीदेगा, जिनकी कीमत 280 रुपये प्रति शेयर तय की गई है। इस लेनदेन की प्रक्रिया पूरी होते ही भारतीय बैंकिंग परिदृश्य में एक बड़ा ढांचागत बदलाव आएगा और आरबीएल बैंक अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के अधीन एक ‘विदेशी बैंक की सहायक कंपनी’ के रूप में काम करना शुरू कर देगा। सौदे की शर्तों के मुताबिक, एमिरेट्स एनबीडी को आरबीएल बैंक के आधिकारिक ‘प्रमोटर’ के रूप में मान्यता मिलेगी और विदेशी बैंक की भारत में वर्तमान में संचालित सभी शाखाओं (मुंबई, चेन्नई और गुरुग्राम) का विलय आरबीएल बैंक के घरेलू नेटवर्क में कर दिया जाएगा।
वित्त मंत्रालय की इस अंतिम हरी झंडी से पहले इस सौदे को सभी प्रमुख विनियामक विभागों से आवश्यक अनुमतियां मिल चुकी हैं। निष्पक्ष व्यापार नियामक भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने इस साल जनवरी में और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने पिछले महीने ही इस प्रस्ताव को अपनी अंतिम स्वीकृति दे दी थी। इस मील के पत्थर पर खुशी जताते हुए आरबीएल बैंक के एमडी और सीईओ आर सुब्रमण्यकुमार ने कहा कि यह निवेश बैंक के विकास सफर का एक ऐतिहासिक मोड़ है। बैंक इस विशाल पूंजी का उपयोग अपनी बैंकिंग तकनीक, जोखिम प्रबंधन और ग्राहकों के डिजिटल अनुभव को वैश्विक स्तर का बनाने के साथ-साथ अपने कॉर्पोरेट बिजनेस सेगमेंट को तेजी से विस्तार देने के लिए करेगा।

