इटारसी। शहर में स्वच्छ भारत मिशन के तहत किए जा रहे लिगेसी वेस्ट (पुराने कचरे) के निष्पादन कार्य में करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप सामने आया है। कांग्रेस नेता अमोल उपाध्याय ने प्रेस वार्ता कर दावा किया कि करीब 1.72 करोड़ रुपये की परियोजना में बिना वास्तविक काम किए लगभग 2500 डंपर कचरे का निपटान कागजों पर दिखा दिया गया।
प्रेस वार्ता में आरोप लगाया गया कि ग्वालियर की एसआर मैप टेक्नोलॉजी कंपनी को 31,400 मीट्रिक टन कचरे के वैज्ञानिक निष्पादन का ठेका दिया गया था, लेकिन मौके पर न तो ट्रॉमेल मशीन और न ही वेट ब्रिज की उचित व्यवस्था थी। इसके बावजूद करीब 84 लाख रुपये का अग्रिम भुगतान कर दिया गया।
अमोल उपाध्याय ने यह भी आरोप लगाया कि घोटाले के सबूत मिटाने के लिए रात के समय कचरे के ढेर में आग लगाई गई, जिससे जहरीली गैसें वातावरण में फैल गईं। उनका दावा है कि इससे पर्यावरण और आम लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है। साथ ही डंप साइट पर गोवंश की मौतों का मुद्दा भी उठाया गया।
मामले को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत में कार्यदायी संस्था, नगरपालिका अध्यक्ष, मुख्य नगर पालिका अधिकारी और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
वहीं नगर पालिका परिषद ने इन आरोपों को भ्रामक और निराधार बताया है। नगरपालिका अध्यक्ष पंकज चौरे का कहना है कि परियोजना पूरी पारदर्शिता और तकनीकी मानकों के अनुसार संचालित की जा रही है। निकाय के अनुसार कचरे के निष्पादन के लिए ड्रोन सर्वे, बायो-कल्चर छिड़काव और ट्रॉमेल मशीन का उपयोग किया गया है।
नगर पालिका ने यह भी स्पष्ट किया कि डंप साइट पर आग लगने की घटना गर्मी और कचरे में मौजूद ज्वलनशील पदार्थों के कारण हुई थी, न कि जानबूझकर लगाई गई आग के कारण। साथ ही निकाय ने कहा कि शिकायतकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत तस्वीरें कार्य पूर्ण होने के बाद की हैं और उन्हें गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है।
