उज्जैन-जावरा फोरलेन पर टकराव तेज: एक दिन में बदली तस्वीर

जावरा। नवीन प्रस्तावित उज्जैन-जावरा फोरलेन निर्माण को लेकर अब विवाद खुलकर सामने आ गया है। नए और पुराने अलाईमेंट को लेकर क्षेत्र में अलग-अलग संघर्ष समितियों की राय बंटी हुई नजर आ रही है, जिससे पूरे मामले में नया मोड़ आ गया है। मंगलवार को जहां एक संघर्ष समिति ने प्रस्तावित नए अलाईमेंट का समर्थन करते हुए सडक़ निर्माण की मांग उठाई थी, वहीं बुधवार को दूसरी समिति ने इसके ठीक विपरीत रुख अपनाते हुए पुराने अलाईमेंट के पक्ष में मोर्चा खोल दिया। समिति के सदस्यों ने मुख्यमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन अनुविभागीय अधिकारी सुनील जायसवाल को सौंपा।

2011 में ही हो गया अधिग्रहण – ज्ञापन में समिति ने स्पष्ट कहा कि जावरा-उज्जैन फोरलेन के लिए वर्ष 2011 में ही हुसैन टेकरी चौराहे से जोयो होटल तक भूमि अधिग्रहित की जा चुकी है और वर्तमान में उसी पर टू-लेन सडक़ संचालित हो रही है। ऐसे में उसी मार्ग को चौड़ा कर फोरलेन बनाया जाना अधिक तर्कसंगत और जनहितकारी है। समिति ने नए अलाईमेंट का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि इसके तहत करीब 16 हेक्टेयर उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण करना पड़ेगा, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। साथ ही, भूमि अधिग्रहण नियमों के विपरीत उपजाऊ जमीन को प्रभावित करना अनुचित बताया गया।

नए एलाइनमेंट में देना हो अधिक मुआवजा

आर्थिक पहलू को लेकर भी समिति ने सवाल उठाए हैं। ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि यदि नए अलाईमेंट पर भूमि अधिग्रहण किया गया, तो सरकार को वर्तमान बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा देना होगा, जिससे करोड़ों रुपए का अतिरिक्त भार पड़ेगा। जबकि पहले से अधिग्रहित भूमि उपलब्ध होने के बावजूद नया अधिग्रहण करना जनता की गाढ़ी कमाई की बर्बादी बताया गया। समिति का कहना है कि पुराने अलाईमेंट पर ही फोरलेन निर्माण करने से न केवल किसानों की जमीन बचेगी, बल्कि परियोजना की लागत और समय दोनों में कमी आएगी। फिलहाल, दोनों पक्षों की अलग-अलग मांगों के चलते उज्जैन-जावरा फोरलेन परियोजना को लेकर स्थिति पेचीदा होती जा रही है। प्रशासन और सरकार के सामने अब यह चुनौती है कि वे जनहित, लागत और विकास के संतुलन को ध्यान में रखते हुए अंतिम निर्णय लें।

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