
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण से जुड़े प्रकरणों में गुरुवार को दूसरे दिन भी सुनवाई जारी रहीं। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ के समक्ष सामान्य वर्ग की ओर से आरक्षण के विरोध में अपनी दलीलें पेश की गई। जिन्हें सुनने के बाद न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई वैकेशन बाद 16 जून को निर्धारित की है।
मामले में गुरुवार को दूसरे दिन हुई सुनवाई पर सामान्य वर्ग की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अमन लेखी ने दलील दी कि ओबीसी आरक्षण के निर्धारण के संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा साहनी और एम नागराज के प्रकरणों के मार्गदर्शी सिद्धांत तय किए हैं। इसके तहत शीर्ष अदालत ने आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 फीसदी तय की है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अपवादिक स्थिति में कुल आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से अधिक हो सकती है, लेकिन मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 27 प्रतिशत आरक्षण का कानून बनाते समय विधेयक में ओबीसी वर्ग की प्रदेश में कुल आबादी 27 फीसदी का उल्लेख किया है। वहीं दूसरी ओर सरकार ने अपने जवाब में ओबीसी की कुल आबादी 51 प्रतिशत का शपथ पत्र दिया है। सरकार ने विशेष परिस्थिति का उल्लेख नहीं किया है, इसलिए ओबीसी का 27 प्रतिशत आरक्षण स्थिर रखे जाने योग्य नहीं है। सामान्य वर्ग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमन लेखी, आदित्य संघी, अंशुल तिवारी तथा ओबीसी वर्ग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, विनायक प्रसाद शाह एवं वरुण ठाकुर उपस्थित हुए।
