चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग ने एलन मस्क, टिम कुक, जेन्सेन हुआंग जेसे प्रमुख अमेरिकी उद्योगपतियों से मुलाकात की

बीजिंग, 14 मई (वार्ता) चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग ने गुरुवार को एलन मस्क (टेस्ला), टिम कुक (एप्पल) और जेन्सेन हुआंग (एनवीडिया) जैसे अमेरिका के दिग्गज उद्योगपतियों से मुलाकात की और अपील की कि वे चीन एवं अमेरिका के बीच संबंधों के ‘स्वस्थ विकास’ को बनाए रखने में सहयोग करें।
यह महत्वपूर्ण बैठक बीजिंग में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच होने वाले उच्च स्तरीय शिखर सम्मेलन के दौरान हुई। बीजिंग में एक दर्जन से अधिक अमेरिकी अधिकारियों को संबोधित करते हुए श्री कियांग ने कहा कि दोनों देशों के बीच बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और व्यापारिक तनाव के बावजूद ‘मित्र और भागीदार’ बने रहने की पूरी क्षमता है।
श्री ट्रंप की इस चीन यात्रा में उनके साथ अमेरिका के 16 प्रमुख उद्योगपतियों का एक बड़ा समूह आया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, श्री ट्रंप चीन के साथ नए निवेश और व्यापार बोर्ड बनाने की संभावनाओं पर काम करना चाहते हैं। इस प्रतिनिधिमंडल में प्रौद्योगिकी, वित्त, एयरोस्पेस और विनिर्माण सहित अमेरिका के लगभग सभी बड़े उद्योगों के प्रतिनिधि शामिल हैं।

इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल होने वाले प्रमुख नामों में एनवीडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) जेन्सेन हुआंग भी हैं, जिन्हें लेकर पहले खबरें थीं कि उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया है। उनके अलावा एप्पल के टिम कुक, ब्लैकरॉक के लैरी फिंक, स्टीफन श्वार्ज़मैन (ब्लैकस्टोन), केली ऑर्टबर्ग (बोइंग), ब्रायन साइक्स (कारगिल), जेन फ्रेजर (सिटी), जिम एंडरसन (कोहेरेंट), लैरी कल्प (जीई एयरोस्पेस) और गोल्डमैन सैक्स के डेविड सोलोमन भी मौजूद हैं। साथ ही इस समूह में जैकब थायसेन (इलुमिना), माइकल मीबैक (मास्टरकार्ड), डीना पॉवेल मैककॉर्मिक (मेटा), संजय मेहरोत्रा (माइक्रोन), क्रिस्टियानो एमोन (क्वालकॉम), एलन मस्क (टेस्ला) और रयान मैकइनेर्नी (वीज़ा) भी शामिल हैं।
श्री ली ने बैठक में कहा, “भविष्य की ओर देखें तो चीन और अमेरिका आपसी सफलता और साझा समृद्धि हासिल करने के लिए मित्र बने रहने में सक्षम हैं।” उन्होंने जोर दिया कि स्थिर द्विपक्षीय संबंधों के लिए केवल सरकारें ही काफी नहीं हैं, बल्कि इसके लिए व्यापारिक समुदाय और समाज के हर वर्ग के प्रयासों की आवश्यकता है।

यह बैठक शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई वार्ता के तुरंत बाद आयोजित की गई, जिसे भविष्य के रिश्तों के लिए रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। श्री ली के अनुसार, दोनों नेताओं ने मुख्य चिंताओं पर चर्चा की और भविष्य के लिए एक ‘रणनीतिक मार्गदर्शन’ प्रदान किया है। हालांकि वार्ता में व्यापार और ताइवान जैसे मुद्दों पर खुलकर चर्चा हुई, लेकिन चीन की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी में ईरान का मुद्दा गायब दिखा। शिखर सम्मेलन से पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने उम्मीद जताई थी कि चीन ईरान के साथ तनाव कम करने और उसे बातचीत के लिए मनाने में सक्रिय भूमिका निभाएगा। लेकिन, चीन के विदेश मंत्रालय ने ईरान का नाम लिए बिना केवल ‘पश्चिमी एशिया की स्थिति’ का संक्षिप्त जिक्र किया। अमेरिका चाहता है कि चीन ईरान को फिर से कूटनीतिक बातचीत के लिए तैयार करे, जबकि चीन इस मामले में सीधे शामिल होने के बजाय एक शांत मध्यस्थ की भूमिका निभाना चाहता है।

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