जहां सब्जी मंडी के लिए बने थे ओटले, अब वहीं बनेगा आधुनिक मॉल

प्रमोद व्यास उज्जैन। शहर के तेजी से विकसित हो रहे महानंदा नगर क्षेत्र में अब एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है. जिस स्थान पर करीब डेढ़ दशक पहले स्थानीय रहवासियों की सुविधा के लिए सब्जी मंडी बनाई गई थी और जहां दुकानों के लिए ओटले तैयार किए गए थे, अब उसी स्थान पर आधुनिक सुविधाओं से युक्त नया शॉपिंग मॉल बनाया जाएगा.

उज्जैन विकास प्राधिकरण (यूडीए) ने इस दिशा में तैयारी शुरू कर दी है और आने वाले समय में यहां मौजूद शेड और ओटलों को हटाकर एक नई व्यावसायिक परियोजना को आकार दिया जाएगा.

 

बेशकीमती जमीन

यह क्षेत्र अब पूरी तरह से शहर के प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों में शामिल हो चुका है. पहले जहां सीमित गतिविधियां होती थीं, वहीं आज यहां दिनभर भारी आवागमन रहता है. दुकानों, बैंक, रेस्टोरेंट, कार्यालयों और बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के कारण यह इलाका लगातार विकसित हो रहा है. ऐसे में यूडीए इस बेशकीमती जमीन का बेहतर उपयोग करते हुए यहां एक और आधुनिक मॉल विकसित करना चाहता है.

 

सब्जी मंडी के ओटले वीरान

इस क्षेत्र में महानंदा नगर, जवाहर नगर, संत कबीर नगर, अलखनंदा नगर, आनंद नगर, महाश्वेता नगर, महाशक्ति नगर और महाकाल वाणिज्य, काला पत्थर सहित अन्य 15 बड़ी कॉलोनियों के लगभग 50 हजार परिवारों को अपने क्षेत्र में ही सब्जी और फल खरीदने की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यूडीए ने वर्ष 2009 में लगभग दो करोड़ रुपये की लागत से सब्जी मंडी का निर्माण कराया था.

 

109 ओटले बनाए थे

यूडीए ने इस योजना के तहत 109 लोगों को भाड़ा-क्रय योजना के अंतर्गत 76 हजार रुपये प्रति ओटला के हिसाब से आवंटन किया गया था. लीज की शर्त स्पष्ट थी कि यहां केवल सब्जी एवं फल व्यवसाय ही किया जा सकेगा. लेकिन योजना का उद्देश्य कभी पूरा नहीं हो सका.

 

17 साल में नहीं खुली मंडी, सड़क पर ही लगता रहा बाजार

ओटले निर्माण के बाद उम्मीद थी कि क्षेत्र के लोग व्यवस्थित और स्वच्छ वातावरण में खरीदारी कर सकेंगे, 17 वर्ष बीत जाने के बावजूद भी मंडी पूरी तरह चालू नहीं हो सकी. प्रत्येक मंगलवार को लगने वाला साप्ताहिक हाट बाजार आज भी सड़क पर ही लगता है. इससे क्षेत्र में यातायात बाधित होता है, गंदगी फैलती है और रहवासियों को असुविधा का सामना करना पड़ता है. दूसरी ओर, करोड़ों रुपये की लागत से बनी मंडी अधिकांश समय खाली पड़ी रहती है.

 

यूडीए कर्मचारियों ने भी खरीदे ओटले

इस योजना की सबसे रोचक बात यह रही कि यूडीए के छह कर्मचारियों और उनके परिजनों ने भी यहां ओटले खरीद रखे थे. बावजूद इसके, प्राधिकरण अपने ही कर्मचारियों को निर्धारित उद्देश्य के अनुसार दुकानें शुरू कराने में सफल नहीं हो सका. कई लोगों ने इन ओटलों को स्वयं व्यवसाय करने के बजाय भविष्य में किराए पर देने या निवेश के रूप में खरीदा था. मंडी में पर्याप्त ग्राहकी नहीं होने के कारण न तो स्वयं दुकानें शुरू हो सकीं और न ही उन्हें किराए पर देना संभव हो पाया.

 

नोटिस, चेतावनी, बैठकें भी बेअसर

यूडीए ने समय-समय पर ओटला धारकों को चेतावनी दी. जुलाई 2017 में बैठक बुलाकर स्पष्ट किया गया कि यदि दुकानों का संचालन शुरू नहीं किया गया तो आवंटन निरस्त किया जा सकता है. नोटिस भी जारी किए गए, लेकिन कुछ समय बाद कार्रवाई ठंडी पड़ गई. स्थानीय स्तर पर साप्ताहिक हाट बाजार को मंडी परिसर में स्थानांतरित करने की कोशिश भी की गई. शुरुआती दो मंगलवार तक कुछ दुकानें अंदर लगीं, लेकिन बाद में व्यापारी पुनः सड़क पर लौट गए.

 

अब बदल चुकी है पूरे क्षेत्र की तस्वीर

पिछले कुछ वर्षों में महानंदा नगर और महाकाल वाणिज्य केंद्र की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है. यह क्षेत्र अब उज्जैन के प्रमुख कमर्शियल जोन के रूप में स्थापित हो चुका है. यहां पहले से ही विकास प्राधिकरण की भूमि पर निर्मित कॉसमॉस मॉल सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है और उससे प्राधिकरण को नियमित लीज आय प्राप्त होती है. प्रस्तावित योजना के तहत वर्तमान शेड और ओटलों को हटाया जाएगा. जिन लोगों ने ओटले खरीदे थे, उन्हें निर्धारित नियमों के अनुसार उनकी जमा राशि लौटाई जाएगी. जानकारी के अनुसार, प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत कुछ प्रतिशत राशि नियमानुसार काटी जा सकती है.

 

सीईओ संदीप सोनी ने शुरू की तैयारी

उज्जैन विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संदीप सोनी ने इस दिशा में प्रारंभिक काम शुरू कर दिया है. उद्देश्य यह है कि शहर के तेजी से बढ़ते व्यावसायिक स्वरूप के अनुरूप इस महत्वपूर्ण भूमि का सर्वोत्तम उपयोग किया जाए.

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