नई दिल्ली | मिडिल-ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर जेट ईंधन (ATF) की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिसका सीधा असर एयर इंडिया के परिचालन पर पड़ा है। एयरलाइन ने जून से अगले तीन महीनों के लिए अपनी करीब 100 अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को निलंबित करने का ऐलान किया है। इनमें दिल्ली से शिकागो, नेवार्क, सिंगापुर और शंघाई जैसे प्रमुख गंतव्य शामिल हैं। एयर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन ने स्पष्ट किया है कि बढ़ते वित्तीय दबाव और ईंधन की बढ़ती लागत के कारण अंतरराष्ट्रीय सेवाओं में यह कटौती करना अनिवार्य हो गया था।
परिचालन चुनौतियों के बीच, एयर इंडिया ने अपने आंतरिक अनुशासन और लागत नियंत्रण उपायों को और कड़ा कर दिया है। पिछले तीन वर्षों में, एयरलाइन ने नीतिगत उल्लंघनों, सामान की तस्करी और एम्प्लॉई लीजर ट्रैवल (ELT) सिस्टम के दुरुपयोग जैसे आरोपों में 1,000 से अधिक कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त किया है। विल्सन ने कर्मचारियों के साथ एक बैठक में बताया कि एयरलाइन अब किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार या लापरवाही के प्रति शून्य सहिष्णुता (जीरो टॉलरेंस) की नीति अपना रही है, ताकि कंपनी की छवि और कार्यक्षमता में सुधार किया जा सके।
टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयर इंडिया इस समय गंभीर वित्तीय संकट के दौर से गुजर रही है। अनुमान है कि मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस को मिलाकर कुल 22,000 करोड़ रुपये से अधिक का घाटा हो सकता है। इस स्थिति से निपटने के लिए प्रबंधन ने कई कड़े कदम उठाए हैं, जिनमें कर्मचारियों की वार्षिक वेतन वृद्धि को रोकना और सभी विभागों के गैर-जरूरी खर्चों में कटौती करना शामिल है। एयरलाइन अब अपने पुनर्गठन प्रयासों के माध्यम से लागत को कम कर परिचालन को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश कर रही है।

