राष्ट्रपति ने 15 नर्सिंग कर्मियों को राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार प्रदान किए

नयी दिल्ली, 12 मई (वार्ता) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में 15 नर्सिंग कर्मियों को उल्लेखनीय सेवा के लिए वर्ष 2026 के लिए राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार प्रदान किए।
राष्ट्रपति भवन सचिवालय के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस पर दिये गये गये इन पुरस्कारों के विजेताओं में छह सहायक नर्स और नौ नर्स शामिल हैं। पुरस्कार विजेताओं में लद्दाख की सहायक नर्स सुश्री कुलविंदर परही , महाराष्ट्र की सहायक नर्स सुश्री उज्वला महादेव सोयम, मिजोरम की सहायक नर्स सुश्री लालेनथांगी नामटे, सिक्किम की सहायक नर्स सुश्री मधु माला गुरुंग , उत्तराखंड की सहायक नर्स सुश्री पूजा परमार राणा और पश्चिम बंगाल की सहायक नर्स सुश्री गीता कर्माकर शामिल हैं।

इसके अलावा यह पुरस्कार पाने वालों में केन्द्र शासित प्रदेश चंडीगढ की सुश्री पूनम वर्मा, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव की सुश्री दीपा बीजू , दिल्ली से डा. श्रवण कुमार ढाका, गोवा से सुश्री रक्षा रूपो पर्वतकर , कर्नाटक की सुश्री कविता जगन्नाथ, केरल की सुश्री मंजू मोल वी. एस, लक्षद्वीप सुश्री आयशा बीबी के, तमिलनाडु से प्रोफेसर (डॉ.) आर. शंकर शानमुगम , आईएचक्यू, रक्षा मंत्रालय (सेना), दिल्ली की मेजर जनरल लिसम्मा पी. वी. शामिल हैं। राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार- 2026 के लिए अपने संदेश में राष्ट्रपति ने कहा कि यह अवसर उन नर्सिंग कर्मियों और स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों के अमूल्य योगदान को उचित सम्मान है जो करुणा और अथक समर्पण के साथ राष्ट्र की सेवा करते हैं।

नर्सिंग कर्मी सेवा के उच्चतम मानकों का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं और अक्सर सबसे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा,” मैं सभी पुरस्कार विजेताओं को कर्तव्य के प्रति उनकी प्रेरणादायक निष्ठा और रोगी देखभाल के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के उनके अथक प्रयासों के लिए बधाई देती हूं।” राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कारों की स्थापना वर्ष 1973 में भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा समाज को नर्सिंग कर्मियों द्वारा प्रदान की गई सराहनीय सेवाओं की मान्यता के प्रतीक के रूप में की गई थी।

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