दुनिया में पहली बार किसी क्रूज शिप पर हंतावायरस का घातक प्रकोप देखा गया है। MV Hondius जहाज से लौटे यात्रियों के पॉजिटिव पाए जाने के बाद US और फ्रांस में हाई अलर्ट घोषित किया गया।
समुद्र के बीचों-बीच छुट्टियां मना रहे पर्यटकों के लिए एक क्रूज यात्रा मौत के सफर में बदल गई। एमवी होंडियस नामक क्रूज शिप पर हंतावायरस के घातक प्रकोप ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, इतिहास में यह पहली बार है जब किसी क्रूज शिप पर इस वायरस का संक्रमण फैला है। इस जहाज से स्वदेश लौटे अमेरिकी और फ्रांसीसी नागरिकों में संक्रमण की पुष्टि होने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हड़कंप मच गया है।
क्रूज शिप पर पहला अटैक
हंतावायरस आमतौर पर चूहों और रोडेंट्स से फैलता है लेकिन इस बार का संक्रमण बेहद असामान्य है। डब्लूएचओ की महामारी और महामारी तैयारी निदेशक मारिया वान केरखोव ने बताया है कि यह किसी क्रूज शिप पर हंतावायरस फैलने का पहला दर्ज मामला है। अब तक इस जहाज के तीन यात्रियों की मौत हो चुकी है जबकि कई अन्य गंभीर रूप से बीमार हैं।
जहाज को फिलहाल कैनरी द्वीप समूह के टेनेरिफ के पास खड़ा किया गया है जहां स्पेनिश अधिकारी यात्रियों को निकालने और उन्हें उनके देशों में वापस भेजने की कार्रवाई कर रहे हैं।
अमेरिका और फ्रांस में अलर्ट
बायो-कंटेनमेंट यूनिट्स में रखे गए मरीज संक्रमण की गंभीरता को देखते हुए अमेरिका और फ्रांस ने अपने नागरिकों को वापस लाने के लिए विशेष सैन्य विमानों का उपयोग किया। अमेरिकी स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि वापस लौटे यात्रियों में से दो अमेरिकी नागरिक पॉजिटिव पाए गए हैं। इनमें से एक को नेब्रास्का यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर की विशेष बायो-कंटेनमेंट यूनिट में रखा गया है जबकि अन्य यात्रियों को क्वारंटाइन सेंटर में निगरानी में रखा गया है।
वहीं, फ्रांस की स्वास्थ्य मंत्री स्टेफनी रिस्ट ने जानकारी दी है कि जहाज से सुरक्षित निकाली गई एक फ्रांसीसी महिला की हालत गंभीर है और उसका संक्रमण लगातार बढ़ रहा है।
क्या है एंडीज वायरस?
वैज्ञानिकों के अनुसार, इस प्रकोप के पीछे हंतावायरस का एंडीज वायरस वेरिएंट है। यह वेरिएंट विशेष रूप से खतरनाक है क्योंकि यह उन गिने-चुने हंतावायरस में से एक है जो इंसानों से इंसानों के बीच निकट संपर्क के जरिए फैल सकता है।
आमतौर पर हंतावायरस चूहों के मल-मूत्र या लार के संपर्क में आने से फैलता है लेकिन इस जहाज पर यात्री एक-दूसरे से संक्रमित हो रहे हैं। संक्रमण के कारण फेफड़ों में गंभीर समस्या और सांस लेने में बहुत ज्यादा तकलीफ होती है जो आगे चलकर जानलेवा भी साबित हो सकती है।
कैसे शुरू हुआ मौत का सफर?
एमवी होंडियस ने मार्च में अर्जेंटीना से अपनी यात्रा शुरू की थी। यह जहाज अंटार्कटिका और अन्य क्षेत्रों की यात्रा करते हुए केप वर्डे के पास पहुंचा जहां पहली बार यात्रियों में गंभीर सांस की बीमारियों के लक्षण देखे गए। 3 मई को पहली बार आधिकारिक तौर पर प्रकोप की सूचना दी गई थी। हालांकि डब्लूएचओ का कहना है कि आम जनता के लिए जोखिम कम है लेकिन बंद स्थानों और निकट संपर्क वाले क्षेत्रों में यह मध्यम श्रेणी का खतरा बना हुआ है।
