नयी दिल्ली, 10 मई (वार्ता) कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ग्रेट निकोबार द्वीप विकास परियोजना को लेकर उन्ह केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि परियोजना के लिए किए गए पर्यावरण प्रभाव आकलन अध्ययन अधूरे हैं जो जल्दबाजी में किए गए हैं और वैज्ञानिक मानकों के खिलाफ हैं। श्री रमेश ने रविवार को कहा कि सरकार ने एक मई 2026 को जारी सवालों के जवाब में दावा किया था कि परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों का व्यापक अध्ययन किया गया है, लेकिन उपलब्ध दस्तावेज इससे मेल नहीं खाते। उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार अंडमान-निकोबार जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में बंदरगाह परियोजनाओं के लिए कम से कम दो से तीन मौसमों का विस्तृत अध्ययन जरूरी है, जबकि यहां केवल कुछ दिनों और एक मौसम के आधार पर सर्वे किए गए है।
पत्र में उन्होंने दावा किया कि लेदरबैक कछुओं, जैव विविधता और समुद्री पारिस्थितिकी से जुड़े सर्वे बेहद सीमित समय में किए गए। उन्होंने कहा कि घने जंगलों के कारण व्यापक सर्वे संभव ही नहीं हो पाया और स्वयं पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) रिपोर्ट ने इसे स्वीकार किया है। कांग्रेस नेता ने एनजीटी द्वारा गठित हाई पावर कमेटी (एचपीसी) की रिपोर्ट को गोपनीय रखने पर भी सवाल उठाए और इसे सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने कहा कि ग्रेट निकोबार की अनूठी जैव विविधता को इस परियोजना से गंभीर खतरा है तथा सरकार को परियोजना की वर्तमान रूपरेखा पर पुनर्विचार करना चाहिए। गौरतलब है कि ग्रेटर निकोबार प्रोजेक्ट को लेकर कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने भी लेख लिखकर कई सवाल उठाए थे। कांग्रेस इस प्रोजेक्ट को लेकर काफी चिंतित है।

