इंदौर: शहर का मास्टर प्लान कब आएगा, इसका किसी को पता नहीं है. पुराने मास्टर प्लान का समय खत्म हुए भी चार साल बीत चुके है. इस कारण नए मास्टर प्लान में 79 गांव की जमीनों पर प्रत्यक्ष रूप से रोक लगाई गई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार परोक्ष रूप से जमीन की विकास अनुमति चुपचाप भोपाल से जारी हो रही है. इतना ही नहीं कितनी जमीनों की एनओसी जारी की गई है, इसका लेखा जोखा भी स्थानीय टीएनसीपी कार्यालय के पास नहीं है.
मास्टर प्लान को लेकर लंबे समय से कवायद चल रही है कि एक महीने में होगा, एक हफ्ते में या एक पखवाड़े में होगा. वास्तविकता यह है कि किसी को पता नहीं है कि इंदौर का मास्टर प्लान कब घोषित होगा? मास्टर प्लान किसी शहर का विजन डॉक्यूमेंट होता है, लेकिन शहर के जनप्रतिनिधियों को इसमें कोई रुचि नहीं है. विभाग के मंत्री इंदौर से ही विधायक है, मगर वे भी कई बार बैठकें ले चुके है, लेकिन नजीता कुछ नहीं निकल पा रहा है.
बताया जा रहा है कि मास्टर प्लान में 79 गांव की जमीन शामिल की गई है और 3 जिलों की सीमा से सीधा जोड़ दिया है. करीब 950 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में मास्टर प्लान का एरिया होगा. चर्चा है कि इंदौर के 79 गांव को मास्टर प्लान में शामिल किया गया है, उनमें धारा 16 का उपयोग करके परोक्ष रूप से जमीनों को अनुमतियां जारी की जा रही है.
वहीं कुछ जमीनों को मास्टर प्लान में धारा 30 के तहत भी एनओसी देने की चर्चा है. कितनी एनओसी इंदौर के 79 गांवों में जारी हो चुकी है और कितनी एनओसी के फाइलें भोपाल में पेंडिंग है, इसकी कोई अधिकृत संख्या और जानकारी स्थानीय टीएनसीपी विभाग के पास नहीं है. स्थानीय अधिकारी सिर्फ एक ही बात बोलते है कि सब भोपाल से जानकारी मिलेगी.
जल्दी होगा प्रकाशनः दुबे
अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे ने कहा कि मास्टर प्लान को लेकर चार दिन पहले भी बैठक ली है. तारीख बताना मुश्किल है, लेकिन इतना कह सकता हूं कि मास्टर प्लान का प्रकाशन जल्दी हो जाएगा.
