
सीधी। पंजा दरी व कालीन उद्योग से सीधी को विश्व स्तरीय पहचान मिलेगी। प्रदेश सरकार के हाल ही में कैबिनेट बैठक में एक जिला एक उत्पाद परियोजना के तहत प्रदेश के 7 जिलों के पारंपरित उत्पादों को प्रोत्साहन देने का निर्णय लिया गया। इसलिए सीधी जिले की प्रसिद्ध पंजा दरी एवं कालीन को भी शामिल किया गया है।
सरकार ने इन उत्पादों के संरक्षण, विकास और विपणन को बढ़ावा देने के लिए आगामी 5 वर्षों में सातों जिलों के लिए संयुक्त रूप से 37.50 करोड़ रुपए की स्वीकृति प्रदान की है। इससे सीधी जिले में दरी-कालीन के पुस्तैनी कारोबार से जुड़े बुनकरों को नई आर्थिक मजबूती मिलने की उम्मीदें हैं। दरअसल आत्मनिर्भर म.प्र. रोड़मैप के तहत वर्ष 2021-22 में सीधी जिले के लिए पंजा दरी एवं कालीन को एक जिला-एक उत्पाद के रूप में चयनित किया गया था। सीधी की दरियां और कालीन अपनी सुंदर बनावट, मजबूत धागों, चटख रंगों और लंबे समय तक टिकाऊ रहने के कारण देश-विदेश में पहचान बना चुकी है। कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय हस्तकला और व्यापार मेलों में इन उत्पादों की सराहना भी हो चुकी है। इसके बावजूद लंबे समय तक इस पारंपरिक उद्योग से जुड़े बुनकर आर्थिक रूप से मजबूत नहीं हो पाए। इसका मुख्य कारण बेहतर बाजार की कमी और कच्चे माल के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता है। देश और दुनिया में पंजा दरी सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है। इसे जिले में महिलाएं अपने घरों के भीतर बनाती हैं। इसके जीआई टैग की लड़ाई भी पिछले काफी समय से चल रही है। सीधी जिले में भरतपुर और सिहावल के हटवा खास गांव का नाम अब विदेशों तक पहुंच गया है। यह गांव महिलाओं द्वारा बनाई गई पंजा दरी के लिए प्रसिद्ध हैं। इस व्यवसाय से जुड़ी महिलाएं लखपती बन गई हैं। सरकार ने इस कामयाबी को देखते हुए पंजा दरी को एक जिला एक उत्पाद योजना में शामिल किया है। भरतपुर, हटवा खास और आसपास के गांवों में आजीविका मिशन के साथ जुड़ी महिलाएं और उनके परिवार सीधे पंजा दरी के काम में शामिल हैं।
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जिले के हजारों परिवार व्यवसाय से जुड़े
जिले में पंजा दरी और कालीन के व्यवसाय से एक हजार से अधिक परिवार जुड़े हुए हैं। लगभग 95 करघे संचालित हो रहे हैं। इसका मुख्य केन्द्र रामपुर नैकिन विकासखंड के भरतपुर के साथ ही सिहावल विकासखंड के हटवा खास, हटवा देवार्थ, खोरबा टोला, पथरौहीं, अमरपुर, मरसर सहित आसपास के गांवों में बड़ी संख्या में बुनकर इस कार्य में लगे हैं। हथकरघा ग्रामोद्योग विभाग अंतर्गत हटवा क्षेत्र में 7 समितियां कार्यरत हैं। जिनसे करीब 500 बुनकर जुड़े हुए हैं। इसके अलावा मध्य प्रदेश डे-ग्रामीण आजीविका परियोजना के तहत 1500 स्वसहायता समूह भी इस कार्य में सक्रिय हैं। जिनमें प्रत्येक समूह में 10 से 15 महिलाएं कार्य कर रही हैं। बुनकरों का कहना है कि स्थानीय बाजार के अभाव में जिले के अधिकांश बुनकर कम्पनियों के आर्डर पर निर्भर हैं। उत्तर प्रदेश की कम्पनियां कच्चा माल और डिजाइन उपलब्ध कराती हैं। जिसके आधार पर बुनकर दरी और कालीन तैयार करते हैं। बाद में यही कम्पनियां इन उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में निर्यात करती हैं। जिससे मुनाफा कम्पनियों को मिलता है।
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इनका कहना है
प्रदेश कैबिनेट की बैठक में एक जिला-एक उत्पाद परियोजना का अनुमोदन किया गया है। इसमें सीधी जिले का दरी एवं कालीन भी शामिल है। योजना के तहत पारंपरिक एवं विशिष्ट उत्पाद दरी एवं कालीन के संरक्षण, विकास और विपणन को प्रोत्साहन मिलेगा। इससे अब दरी एवं कालीन के पुस्तैनी व्यवसाय से जुड़े बुनकरों के दिन बहुरेंगे और वह आर्थिक रूप से सशक्त होंगे।
रोहित पटेल, सहायक संचालक हथकरघा ग्रामोद्योग सीधी
