बैतूल: मध्य-पूर्व में बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव और कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने का असर अब बैतूल जिले की सड़क परियोजनाओं पर भी दिखाई देने लगा है। डामर (बिटुमेन) की भारी कमी और कीमतों में तेज बढ़ोतरी के कारण शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक कई सड़क निर्माण कार्य प्रभावित हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार डामर कच्चे तेल की रिफाइनिंग प्रक्रिया के बाद बचने वाला भारी पदार्थ होता है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से सड़कों के निर्माण में किया जाता है। अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच बढ़े तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर डामर उत्पादन और उपलब्धता पर पड़ा है।
स्थानीय ठेकेदारों का कहना है कि वर्तमान में डामर की कीमतें सामान्य दरों की तुलना में लगभग तीन गुना तक बढ़ चुकी हैं। ऐसे में पुराने टेंडर और तय दरों पर सड़क निर्माण करना आर्थिक रूप से संभव नहीं रह गया है।स्थिति का असर बैतूल शहर की कई स्वीकृत सड़क परियोजनाओं पर पड़ रहा है। विभिन्न वार्डों में बनने वाली डामर सड़कों के वर्क ऑर्डर जारी हो चुके हैं, लेकिन निर्माण एजेंसियां बढ़ी हुई लागत के कारण काम शुरू नहीं कर पा रही हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी कई प्रस्तावित और निर्माणाधीन सड़क कार्य फिलहाल बंद पड़े हैं। निर्माण एजेंसियों ने प्रशासन को स्पष्ट कर दिया है कि मौजूदा दरों पर डामर खरीदकर सड़क निर्माण करना घाटे का सौदा साबित होगा। ऐसे में अधिकांश ठेकेदार हालात सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं।सड़क निर्माण रुकने से आम लोगों की परेशानी भी बढ़ने लगी है। नागरिकों का कहना है कि यदि बारिश शुरू होने से पहले सड़कें नहीं बन पाईं, तो पूरे मानसून सीजन तक इंतजार करना पड़ेगा।
तकनीकी कारणों से बरसात के दौरान डामर सड़क निर्माण नहीं किया जाता, जिससे अधूरी और खराब सड़कों पर लोगों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हालात सामान्य नहीं होते और कच्चे तेल की आपूर्ति स्थिर नहीं होती, तब तक डामर की कीमतों और उपलब्धता में सुधार की संभावना कम बनी रहेगी।
