नयी दिल्ली, 07 मई (वार्ता) दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता डॉ. नरेश कुमार ने प्रदेश सरकार पर किसानों के मुद्दे पर असंवेदनशील रवैया अपनाने का आरोप लगाया है और कहा कि किसानों की समस्या को हल करने में रेखा गुप्ता सरकार पूरी तरह से विफल साबित हुई है। डॉ. कुमार ने गुरुवार को यहां संवाददाताओं से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री पर हमला बोला और कहा कि प्रदेश के लगभग 197 गांवों में करीब 52 हजार हेक्टेयर भूमि पर खेती हो रही है लेकिन यहां के किसानों की हालत देश के अन्य राज्यों के किसानों से भी बदतर हो चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को खाद, बीज और कीटनाशक तक उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं, जिसके कारण उन्हें हरियाणा और उत्तर प्रदेश से महंगे दामों पर सामान खरीदना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि रेखा सरकार किसानों और ग्रामीणों के मुद्दों पर पूरी तरह विफल साबित हुई है। मुख्यमंत्री सिर्फ मंचों और कैमरों तक सीमित हैं, जबकि गांवों में किसान बदहाली, बेरोजगारी और सरकारी उपेक्षा का शिकार हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने किसानों को केवल झूठे वादे, समितियां और आश्वासन दिए, लेकिन जमीन पर कोई ठोस काम नहीं किया। प्रदेश प्रवक्ता ने दिल्ली सरकार में मंत्री प्रवेश साहिब सिंह पर निशाने साधते हुए कहा कि दिल्ली देहात से होने के बावजूद भी किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के मुद्दों पर उनकी चुप्पी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।चुनाव के समय किसानों और ग्रामीणों से बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन सत्ता में आते ही सब कुछ भुला दिया गया। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेताओं को किसानों की परेशानियों से कोई लेना-देना नहीं है और वे केवल बयानबाजी तथा राजनीतिक दिखावे में लगे हुए हैं।
उन्होंने कहा कि दिल्ली के ग्रामीण इलाकों की लगातार अनदेखी की जा रही है और किसानों को उनकी बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित रखा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की किसान विरोधी नीतियों के कारण गांवों में भारी नाराजगी है और जनता अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में बीएससी एग्रीकल्चर, बीएससी डेयरी टेक्नोलॉजी और बीएससी वेटनरी जैसे पाठ्यक्रमों के कॉलेज मौजूद नहीं हैं। इसी वजह से दिल्ली ग्रामीण विकास विभाग द्वारा दूसरे राज्यों में पढ़ाई करने वाले छात्रों को स्पॉन्सरशिप और आर्थिक सहायता उपलब्ध करायी जाती थी, लेकिन इस योजना को भी बंद कर दिया गया है। उन्होंने मांग की कि छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए इस योजना को तत्काल प्रभाव से फिर से बहाल किया जाए।

