इंडिया गठबंधन के भविष्य पर सवाल

दिल्ली डायरी

प्रवेश कुमार मिश्र

पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव परिणाम में जिस तरह से पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी टीएमसी और तमिलनाडु में डीएमके पराजित हुई है उसके बाद इंडिया गठबंधन के भविष्य को लेकर अटकलबाजी शुरू है. कहा जा रहा है कि उक्त दोनों दलों के पराजय के बाद कांग्रेस पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता भविष्य की लडाई अकेले दम पर लडने के पक्ष में दलील दे रहें हैं . जबकि ज्यादातर नेता जल्द से जल्द विपक्षी समूह को एकजुट करने के उद्देश्य से बैठक बुलाकर भविष्य की रणनीति और विपक्षी एकजुटता पर व्यापक चर्चा कराने के पक्ष में अपना तर्क दे रहे हैं . हालांकि एक चर्चा यह भी हो रही है कि कांग्रेस को छोडकर समान विचारधारा वाले दलों के एक बडे समूह को एकजुट कर तीसरे मोर्चे के रूप में देश के मतदाताओं के सामने विकल्प रखा जाए. लेकिन इन सभी चर्चाओं के बीच सबकी निगाहें सपा, राजद, टीएमसी, डीएमके, शिवसेना उद्धव जैसे बडे दलों के रूख पर टिकी है.
भाजपा का उत्तरपूर्व पर कब्जा के आगे क्या
पश्चिम बंगाल विजय व असम में पुनर्वापसी के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा हो रही है कि भाजपाई विजयी रथ अब उत्तरपूर्वी राज्यों पर फतह के बाद किस दिशा का रूख करेगा. हालांकि भाजपा दक्षिण में कमल खिलाने के अपने मुहिम में लगातार प्रयास के बावजूद असफल हो रही इसलिए कहा जा रहा है कि 2029 लोकसभा चुनाव के पहले उसका प्रयास पंजाब व हिमाचल प्रदेश पर कब्जा करने का हो सकता है. क्योंकि पिछले दिनों जिस तरह से पंजाब से संबंध रखने वाले आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सदस्यों ने भाजपा का दामन थामा है उससे साफ हो रहा है कि भाजपा पंजाब में एक साथ कांग्रेस, अकालीदल और आप को एक साथ चुनौती देकर बडा संदेश देने का प्रयास करेगी. संभवः इसी वजह से भाजपा के मिशन पंजाब धमक से आम आदमी पार्टी के रणनीतिकार परेशान हैं.
दिग्विजय सिंह के बयान के तलाशे जा रहे हैं मायने
मध्य प्रदेश कांग्रेस में हाल ही में वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के बीच एक दिलचस्प जुबानी जंग देखने को मिली है, जिसने राज्य की राजनीति में हलचल के साथ-साथ दिल्ली में भी चर्चा का विषय बनाया हुआ है. पिछले दिनों भोपाल में हुई कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग की बैठक में दिग्विजय सिंह ने जीतू पटवारी पर तंज कसते हुए एक मुहावरे का प्रयोग किया कि गुरू गुड़ रह गया और चेला शक्कर हो गया. हालांकि बयान का अंदाज व बाद में पटवारी का जवाब भी माहौल के अनुकूल ही था लेकिन बाद में इसको लेकर कानाफूसी आरंभ हो गई. कांग्रेस इस पूरी घटना को एक सामान्य संवाद बता रही है, जबकि राजनीतिक गलियारों में इसे पुराने और नए नेतृत्व के बीच शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है.

केरल के मुख्यमंत्री बनने के लिए दिल्ली में लाबिंग
कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट केरल में पूरे एक दशक के अंतराल के बाद सत्ता में लौटा है. चुनाव परिणाम के बाद कांग्रेस पार्टी के अंदर मुख्यमंत्री पद हासिल करने के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच रस्साकस्सी आरंभ है. चर्चा है कि कांग्रेस के दिग्गज नेता के सुधाकरन ने पार्टी आलाकमान को पत्र लिखकर केसी वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री बनाने की सिफारिश की है. संगठन महासचिव वेणुगोपाल को राहुल गांधी का करीबी माना जाता है. चर्चा है कि उनके समर्थकों ने केरल में उनके कटआउट लगाकर अपनी पसंद स्पष्ट कर दी है. जबकि निवर्तमान सरकार में विपक्षी नेता रहे वी डी सतीशन को भी एक मजबूत दावेदार माना जा रहा है. एग्जिट पोल में उन्हें मुख्यमंत्री पद के लिए एक पसंदीदा चेहरे के रूप में दिखाया गया है. उन्होंने दिल्ली में अपनी पकड़ मजबूत करने और समर्थन जुटाने के लिए विधायकों से संपर्क साधना शुरू कर दिया है. इसके अलावा वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला ने भी मुख्यमंत्री पद के लिए सक्रिय रूप से लॉबिंग शुरू की है. वे नवनिर्वाचित विधायकों और राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ बैठकें कर रहे हैं ताकि अपना पक्ष मजबूत कर सकें.

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