भोपाल। मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीएसईडीसी) के पूर्व टेस्टर सौरभ चौहान ने संबल 2.0 परियोजना की जांच रिपोर्ट और उस पर की गई कार्रवाई को सार्वजनिक रूप से चुनौती देते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि आधिकारिक जांच में प्रत्यक्ष जिम्मेदारी से मुक्त किए जाने के बावजूद उन्हें अनुचित रूप से नौकरी से हटा दिया गया।
करीब तीन वर्षों तक एमपीएसईडीसी में कार्यरत रहे चौहान ने बुधवार को अपनी कार पर जांच रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेज चिपकाकर विरोध दर्ज कराया। उनका कहना है कि उन्होंने संबल 2.0, डीई और एमपीपीएससी परियोजनाओं में पूरी निष्ठा से कार्य किया और सेवा अवधि के दौरान उन्हें कभी कोई कारण बताओ नोटिस या प्रतिकूल सूचना नहीं मिली।
विवाद की जड़ श्रम कल्याण पोर्टल के माध्यम से लगभग 45 करोड़ रुपये के त्रुटिपूर्ण भुगतान से जुड़ी है। चौहान का दावा है कि जांच समिति ने उन्हें सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं माना, फिर भी तीन कर्मचारियों के साथ उन्हें बर्खास्त कर दिया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह त्रुटि मानवीय थी और भुगतान जल्द शुरू करने के दबाव में पर्याप्त परीक्षण का समय नहीं मिल सका। साथ ही, 12 अधिकारियों की संलिप्तता के बावजूद वरिष्ठ अधिकारियों, यहां तक कि तकनीकी कार्य देख रहे गैर-तकनीकी अधिकारी पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
तकनीकी खामियों का हवाला देते हुए चौहान ने कहा कि टेस्टर को उपलब्ध स्टेजिंग सर्वर पर पेमेंट मॉड्यूल मौजूद ही नहीं था और सर्वर कोड भी समन्वित नहीं थे। उन्होंने निष्पक्ष जांच, पुनर्नियुक्ति और लंबित वेतन के भुगतान की मांग की है।
