जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट ने एक मामले में राज्य सरकार द्वारा एकलपीठ के फैसले के खिलाफ पुनरीक्षण याचिका दायर करने में 242 दिनों की भारी देरी को अनुिचत करार दिया। जस्टिस आरसीएस बिसेन की एकलपीठ ने सरकार की याचिका निरस्त कर दी। एकलपीठ कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देश के तहत तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से सेवानिवृत्ति के बाद वसूली नहीं की जा सकती है।
दरअसल, राज्य शासन ने हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी कि जिसमें सेवानिवृत्त कर्मी भोलानाथ विश्वकर्मा को 6 फीसदी ब्याज के साथ एक लाख 15 हजार रुपए की राशि लौटाने सरकार को कहा गया था। भोलानाथ की ओर से दलील दी गई कि सरकार ने बहुत देरी से पुनरीक्षण याचिका दायर की है। देरी के लिए ठोस और संतोषजनक जवाब भी नहीं दिया है। सुनवाई के बाद न्यायालय ने सरकार की देरी माफी का आवेदन और पुनरीक्षण याचिका निरस्त कर दिया
