भारत और वियतनाम ने दुर्लभ खनिज और रक्षा सहित 12 महत्वपूर्ण क्षेत्रों में समझौते किये

नयी दिल्ली 06 अप्रैल (वार्ता) भारत और वियतनाम ने द्विपक्षीय संबंधों को और प्रगाढ बनाने के लिए दुर्लभ खनिज , रक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा और सूचना प्रौद्योगिकी सहित 12 महत्वपूर्ण क्षेत्रों में समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर करने के साथ-साथ कई अहम घोषणाएं भी की हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारत की यात्रा पर आये वियतनाम के राष्ट्रपति तो लम के बीच बुधवार को यहां द्विपक्षीय वार्ता के बाद इन समझौतों पर हस्ताक्षर किये गये। दोनों देशों ने संबंधों को “एन्हांस्ड कॉम्प्रिहेन्सिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” तक उन्नत करने का निर्णय लिया जो हिन्द -प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते सहयोग और रणनीतिक सामंजस्य को बताता है। इन समझौतों के तहत कई क्षेत्रों में सहयोग बढाने पर सहमति बनी है, विशेष रूप से, दुर्लभ खनिज (रेयर अर्थ एलिमेंट्) के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक अहम समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये गये जो इलेक्ट्रॉनिकी, नवीकरणीय ऊर्जा और रक्षा जैसे क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है। डिजिटल क्षेत्र में, सूचना प्रौद्योगिकी और उभरती तकनीकों में सहयोग को मजबूत करने पर भी सहमति बनी है। इसके साथ ही वित्तीय सहयोग को बढ़ाते हुए दोनों देशों के केंद्रीय बैंकों और भुगतान संस्थाओं के बीच समझौते हुए हैं, जिनसे सीमा-पार डिजिटल भुगतान और क्यू आर आधारित लेनदेन को बढ़ावा मिलेगा।
स्वास्थ्य क्षेत्र में भी सहयोग मजबूत करने का निर्णय लिया गया है ।

इसमें दवाइयों, चिकित्सा उपकरणों और जैविक उत्पादों के नियमन से जुड़े समझौते किए गए हैं। शिक्षा और सांस्कृतिक क्षेत्र में कई पहलें शुरू की गई हैं, जिनमें वियतनाम के विश्वविद्यालयों में भारतीय अध्ययन केंद्र स्थापित करना और प्राचीन चाम पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण शामिल है, जो दोनों देशों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करेगा। शहरी विकास के क्षेत्र में मुंबई और हो ची मिन्ह सिटी के बीच सहयोग स्थापित किया गया है, जिससे शहरी प्रबंधन और आर्थिक विकास के अनुभवों का आदान-प्रदान होगा। इसके अलावा, सार्वजनिक क्षेत्र के ऑडिट में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए भी दोनों देशों ने सहयोग को आगे बढ़ाया है। पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करने के लिए 2026 से 2030 तक के लिए सांस्कृतिक विनिमय कार्यक्रम और पर्यटन समझौते किए गए हैं, जो लोगों के बीच संबंधों को और मजबूत करेंगे।

दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 25 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य भी तय किया है। साथ ही, वियतनाम ने ‘इंडो-पैसिफिक ओशंस इनिशिएटिव’ में शामिल होने की घोषणा की है, जिससे क्षेत्रीय सहयोग और समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा। कृषि व्यापार को बढ़ाते हुए भारत से अंगूर का निर्यात और वियतनाम से ड्यूरियन का आयात किया जाएगा। इसके अलावा, माय सोन स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल पर एक साइट इंटरप्रिटेशन सेंटर स्थापित करने की भी घोषणा की गई है, जो पर्यटन और सांस्कृतिक संरक्षण को बढ़ावा देगा। इन समझौतों और घोषणाओं के साथ भारत और वियतनाम ने आर्थिक, तकनीकी और सांस्कृतिक क्षेत्रों में अपने सहयोग को और गहरा करने तथा क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता जतायी है।

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