ईरान युद्ध के एक महीने पूरे, परमाणु संयंत्र पर हमला, अबू धाबी में भारतीय घायल और हूतियों की सीधी जंग

वॉशिंगटन/तेहरान, 28 मार्च (वार्ता) पश्चिम एशिया में तनाव अब एक पूर्ण विकसित क्षेत्रीय युद्ध की ओर बढ़ता दिख रहा है और ईरान के परमाणु ऊर्जा संयंत्र को निशाना बनाए जाने, संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी में भारतीय नागरिकों के घायल होने तथा यमन के हूती विद्रोहियों के इजरायल पर सीधे हमले ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है।

आज से ठीक एक महीने पहले इजरायल-अमेरिका की संयुक्त हवाई सेना ने ईरान पर हमला किया था, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई मारे गये थे। इस हमले में स्कूल की 168 छात्रों समेत कुल 175 निर्दोषों के मारे जाने की सूचना ईरान ने संयुक्त राष्ट्र में दी थी। इसके जवाब कार्रवाई में ईरान ने भी इजरायल ओर खाड़ी स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हमले किये थे।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ हजारों लक्ष्यों की सूची तैयार होने की चेतावनी दी है, जबकि अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में अपनी नौसैनिक उपस्थिति को अभूतपूर्व स्तर पर बढ़ा दिया है।

संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में शनिवार तड़के ईरान की ओर से दागी गयी बैलिस्टिक मिसाइल के कारण भारी दहशत फैल गयी। हालांकि यूएई की वायु रक्षा प्रणालियों ने इस मिसाइल को हवा में ही नष्ट कर दिया, लेकिन इसका जलता हुआ मलबा शहर के तीन अलग-अलग स्थानों पर गिरा। मलबे के कारण लगी आग की चपेट में आने से पांच भारतीय नागरिक और एक पाकिस्तानी नागरिक घायल हो गए। कार्यालय ने पुष्टि की है कि घायलों की कुल संख्या छह है और उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता प्रदान की गई है।

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने चिंताजनक सूचना साझा करते हुए बताया है कि ईरान ने अपने बुशेहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र (एनपीपी) के इलाके में एक और हमले की जानकारी दी है। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले मात्र 10 दिनों के भीतर बुशेहर संयंत्र के पास होने वाली यह तीसरी हमले की घटना है। आईएईए ने ‘एक्स’ पर स्पष्ट किया कि इस हमले से फिलहाल रिएक्टर को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है और न ही इलाके में रेडिएशन फैला है, लेकिन परमाणु प्रतिष्ठान के पास लगातार होते हमले एक बड़े पर्यावरणीय और मानवीय खतरे की ओर इशारा कर रहे हैं।

संघर्ष के विस्तार में एक नया और खतरनाक अध्याय तब जुड़ा, जब यमन के हूती बलों ने घोषणा की कि उन्होंने इजरायल के सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। हूतियों ने इस हमले को ईरान, लेबनान, इराक और फिलिस्तीनी क्षेत्रों पर हुए हमलों का प्रतिशोध बताया है। मौजूदा संघर्ष शुरू होने के बाद से इजरायल पर हूतियों का यह पहला सीधा हमला है। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि ईरान समर्थित विभिन्न गुट अब संगठित होकर इजरायल और अमेरिकी हितों को निशाना बना रहे हैं।

इस बीच ईरान ने दावा किया है कि उसकी सशस्त्र सेनाओं ने ओमान के सलालाह बंदरगाह पर तैनात अमेरिकी नौसेना के एक सपोर्ट जहाज पर हमला किया है। इसके अलावा, ईरानी प्रवक्ता श्री ज़ोल्फाघारी ने यह भी दावा किया कि सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर हुए हमले में अमेरिकी सेना के दो रिफ्यूलिंग विमान नष्ट कर दिये गये हैं।

ईरान ने आगे सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि उसने दुबई में उन दो विशिष्ट स्थानों को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाया है जहां अमेरिकी सैनिक तैनात थे। बयान के अनुसार, एक स्थान पर 400 से अधिक और दूसरे पर 100 से ज्यादा अमेरिकी कर्मी मौजूद थे। ईरानी प्रवक्ता ने डोनल्ड ट्रंप को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यह क्षेत्र ‘अमेरिकी सैनिकों के लिए कब्रगाह’ साबित होगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि अमेरिकी सेना के पास ईरान पर हमला करने और अपना सैन्य अभियान पूरा करने के लिए अभी 3,554 लक्ष्य बाकी हैं। मियामी में एक निवेश सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने नाटो सहयोगियों पर भी जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने में सहायता न देने के लिए सहयोगियों को ‘कागजी शेर’ करार दिया और कहा कि अमेरिका नाटो की सुरक्षा पर सालाना सैकड़ों अरब डॉलर खर्च कर रहा है, लेकिन जरूरत के समय वे गायब हैं।

तनाव को देखते हुए अमेरिका ने अपनी नौसैनिक शक्ति का प्रदर्शन तेज कर दिया है। विमानवाहक पोत यूएसएस जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश को अब केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) के कार्यक्षेत्र में तैनात किया जा रहा है। वर्तमान में इस क्षेत्र में पहले से ही यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड और यूएसएस अब्राहम लिंकन के नेतृत्व में दो स्ट्राइक समूह सक्रिय हैं। इसके अलावा गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक यूएसएस रॉस, यूएसएस डोनाल्ड कुक और यूएसएस मेसन को भी युद्धक संचालन में सहयोग के लिए रवाना कर दिया गया है।

इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने साफ कर दिया है कि यदि ईरान के आर्थिक केंद्रों या बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया, तो इसका जवाब बेहद कड़ा होगा। उन्होंने क्षेत्रीय देशों से पुरजोर अपील की है कि वे अपनी धरती का उपयोग ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए न होने दें।

 

 

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