
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने दहेज प्रकरण से जुड़े एक मामले में कहा है कि वैवाहिक विवादों में पति के रिश्तेदारों को फंसाने की बढ़ती प्रवृत्ति चिंताजनक है। जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने कहा है कि वैवाहिक विवाद के दौरान लगाए गए सामान्य आरोपों के माध्यम से झूठे आरोप, यदि अनियंत्रित छोड़ दिए जाएं तो कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। उक्त मत के साथ न्यायालय ने पति के रिश्तेदारों के खिलाफ दर्ज एफआईआर और उससे जुड़ी कार्रवाई निरस्त कर दी। हालांकि न्यायालय ने कहा कि पति के खिलाफ ट्रायल जारी रहेगा।
दरअसल विदिशा निवासी शुभम साहू व अन्य की ओर से यह मामला दायर किया गया। जिनकी ओर से अधिवक्ता आकाश सिंघई ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि शुभम की शादी सागर में रहने वाली निधि से 2022 में हुई थी। शादी के कुछ दिन बाद निधि की तबियत खराब होने लगी और वह अपने मायके चली गई। कुछ दिन बाद निधि लापता हो गई। शुभम ने जुलाई 2025 में विवाह विच्छेद का आवेदन लगाया। इसके विरोध में पत्नी ने पति और उसके रिश्तेदारों के खिलाफ दहेज प्रताडऩा की एफआईआर दर्ज करवा दी। सुनवाई के बाद न्यायालय ने कहा कि वैवाहिक विवादों में बिना ठोस साक्ष्य के परिवार के सदस्यों को फंसाना न्यायसंगत नहीं है। उक्त मत के साथ न्यायालय ने रिश्तेदारों के खिलाफ दर्ज एफआईआर व कार्रवाई निरस्त कर दी।
