जबलपुर: वन परिक्षेत्र पनागर की मेहनत रंग लाई है। तमाम साक्ष्य जुटाकर अदालत में पेश करने के बाद अदालत ने आखिरकार बार्किंग डियर (काकड़) के शिकारियों को सजा सुना दी है। वन विभाग पनागर रेंज कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2018 में पनागर परिक्षेत्र के ककरतला बीट में बार्किंग डियर (काकड़) के शिकार के मामले में अदालत ने दो आरोपियों को दोषी करार देते हुए दो-दो वर्ष का कारावास और 2000-2000 का जुर्माना सुनाया है।
जुर्माना न देने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतने का आदेश जारी किया है। आरोपी कैलाश यादव (56 वर्ष) एवं जनार्दन गौड़ (52 वर्ष) को वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 39/51 के तहत दंडित किया गया है। सामान्य भाषा में बार्किंग डियर को भौंकने वाला हिरण भी बोला जाता है। ये पूरी जानकारी पनागर वन परिक्षेत्र अधिकारी सौरभ शर्मा ने नवभारत को दी है।
गौरतलब है कि वर्ष 2018 में पनागर रेंज के ककरतला बीट में कैलाश यादव और जनार्दन गौंड़ ने बार्किंग डियर (काकड़) का शिकार किया था जिस पर वन विभाग की टीम ने दोनों को पकड़ा था। इस प्रकरण में पनागर परिक्षेत्र स्टाफ की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई अहम रही। हाल ही में अंतिम सुनवाई के दौरान पनागर परिक्षेत्र अधिकारी सौरभ शर्मा और उनकी टीम ने सशक्त साक्ष्य व तर्क प्रस्तुत किए, जिसके परिणामस्वरूप न्यायालय ने आरोपियों को दोषी मानते हुए यह फैसला सुनाया। सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि वन्यजीवों का शिकार समाज और पर्यावरण दोनों के लिए घातक है, और ऐसे अपराधों पर कठोर कार्रवाई आवश्यक है।
