
इंदौर. सिंहस्थ महापर्व के भव्य आयोजन को लेकर मध्य प्रदेश के विभिन्न विभागों ने अपनी कमर कस ली है. इसी कड़ी में मध्य प्रदेश पुलिस और राज्य साइबर सेल ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए एक विशेष योजना तैयार की है. इस योजना के तहत साइबर वॉरियर्स की एक बड़ी टीम तैयार की जा रही है जो सिंहस्थ के दौरान आने वाले लाखों लोगों को डिजिटल ठगी से बचाने में मदद करेगी. वर्तमान समय में पुलिस के लिए साइबर अपराध एक बहुत बड़ी चुनौती के रूप में उभरा है और सिंहस्थ जैसे वैश्विक आयोजन में यह खतरा और भी बढ़ जाता है.
साइबर सेल इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत बड़े स्तर पर वालेंटियर्स को जोड़ रहा है. जानकारी के अनुसार इस प्रोजेक्ट के लिए अब तक एक हजार से अधिक छात्रों ने अपना पंजीकरण करा लिया है. विभाग ने कुल दो हजार वालेंटियर्स तैयार करने का लक्ष्य रखा है. इन छात्रों को साइबर अपराधों से निपटने और लोगों को जागरूक करने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि वे मेला क्षेत्र में प्रभावी भूमिका निभा सकें. सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालु केवल उज्जैन तक सीमित नहीं रहते, बल्कि इंदौर और ओंकारेश्वर जैसे धार्मिक केंद्रों की भी बड़ी संख्या में यात्रा करते हैं. इस यात्रा मार्ग पर श्रद्धालु विभिन्न कंपनियों की सेवाओं और सुविधाओं का लाभ लेते हैं, जिसका फायदा उठाकर साइबर ठग उन्हें अपना निशाना बना सकते हैं. विशेष रूप से बुजुर्गों और महिलाओं को इन ठगों से बचाने के लिए पुलिस ने विशेष कार्ययोजना बनाई है.
तत्काल मिलेगी सहायता, चलाए जाएंगे जागरूकता अभियान
राज्य साइबर सेल इंदौर के एसपी सव्यचारी सराफ ने बताया कि साइबर अपराधों से निपटने के लिए कई स्तरों पर जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे. इस साल शिवरात्रि के दौरान उज्जैन में एक सफल प्रयोग भी किया गया था, जहां मंदिर परिसर में विशेष कैंप लगाकर पीड़ितों की तुरंत एफआईआर दर्ज करने की व्यवस्था की गई थी. इसके साथ ही पोस्टरों और विज्ञापनों के जरिए लोगों को ठगी से बचने के तरीके सिखाए गए थे. सिंहस्थ के दौरान इस टीम के जगह जगह पर केंद्र होंगे, कोई भी इन केंद्रों पर किसी भी तरह से मदद मांग सकेगा. उसकी तुरंत मदद की जाएगी.
संपूर्ण मेला क्षेत्र में तैनात रहेगी छात्रों की साइबर टीम
साइबर सेल की टीम वर्तमान में विभिन्न कॉलेजों के संपर्क में है ताकि सेवा के इच्छुक छात्रों को जोड़ा जा सके. ये वालेंटियर्स सिंहस्थ के दौरान पूरे मेला क्षेत्र में तैनात रहेंगे. इनका मुख्य कार्य संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना और तकनीकी रूप से कम जानकार श्रद्धालुओं को डिजिटल सुरक्षा के प्रति सचेत करना होगा. विभाग का मानना है कि इस जनभागीदारी से साइबर अपराधों की दर में भारी कमी आएगी.
