
रीवा। मप्र हाईकोर्ट ने एक अनुकंपा नियुक्ति आवेदन पर बहुत देरी से और अस्पष्ट निर्णय लेने पर यूनियन बैंक ऑफ इंडिया मुंबई पर कड़ी नाराजगी जताई। जस्टिस जेके पिल्लई की एकलपीठ ने बैंक प्रबंधन पर 50 हजार रुपए की कॉस्ट लगाई। इसके साथ ही बैंक को निर्देशित किया है कि याचिकाकर्ता को अनुकंपा नियुक्ति देने पर विचार करते हुए निर्णय पारित करें। न्यायालय ने कहा कि बैंक 30 दिन के भीतर कॉस्ट की 50 हजार रुपए की राशि याचिकाकर्ता को प्रदान करे।
रीवा निवासी निखिल कोल की ओर से अधिवक्ता नर्मदा प्रसाद चौधरी एवं अमित चौधरी ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि याचिकाकर्ता के पिता स्व शंकर प्रसाद कोल की ड्यूटी के दौरान 7 जुलाई 2016 को निधन हो गया था। याचिकाकर्ता ने नवंबर 2016 में ही अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन पेश कर दिया था। इसके बावजूद बैंक ने दो साल तक आवेदन को लंबित रखा। बाद में 2018 में निरर्थक कारण बताते हुए आवेदन निरस्त कर दिया। न्यायालय ने अधिकारियों द्वारा अपनाए गए घोर उदासीन रवैये पर कड़ी आपत्ति जताई। इसके साथ ही कहा कि यह विवादित कार्रवाई कानून की दृष्टि से मान्य नहीं है। जिसके बाद न्यायालय ने उक्त निर्देश दिये।
