नयी दिल्ली, 11 अक्टूबर (वार्ता) केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने नयी दिल्ली विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 में पदक जीतने वाले भारतीय दल को शनिवार को सम्मानित किया और उनके असाधारण जज्बे, दृढ़ संकल्प और रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन की सराहना की।
भारत विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए छह स्वर्ण, नौ रजत और सात कांस्य सहित कुल 22 पदक जीतकर 10वें स्थान पर रहा। खेल मंत्रालय के खेल विभाग ने पैरा एथलीटों को 1.09 करोड़ रुपये से अधिक के नकद पुरस्कार प्रदान किए गए। भारत की मेजबानी में हुए इस टूर्नामेंट में 100 देशों के 2,100 से अधिक प्रतिभागियों ने 186 पदक स्पर्धाओं में भाग लिया था।
आज यहां सम्मान समारोह के दौरान डॉ. मांडविया ने कहा, “आप पैरा एथलीट नहीं, बल्कि भारत के पावर एथलीट हैं। पदक जीतकर आपने देश को जो गौरव दिलाया है और खासकर दिव्यांगों को जो प्रेरक संदेश दिया है, वह काबिले तारीफ है। आपने जो जुनून दिखाया है, वह अद्भुत है। अपने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिखाए गए नए भारत के विजन और भावना को बेहतरीन तरीके से कायम रखा गया है। प्रधानमंत्री टीवी पर आपके मैच देख रहे थे और हमारी बैठकों के दौरान आप सभी के बारे में पूछते रहते थे।”
इस अवसर पर भारतीय पैरालंपिक समिति (पीसीआई) के अध्यक्ष देवेंद्र झाझरिया ने कहा, “खेल मंत्रालय और भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) ने एक परिवार की तरह हमारी मदद की है। डब्ल्यूपीए ने इस आयोजन की सफल मेजबानी के लिए आयोजन के अंतिम दिन हमें एक ट्रॉफी प्रदान की। उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी होगी कि भारत आगे भी ऐसे और आयोजनों की मेजबानी करे। अंतरराष्ट्रीय संघों से प्रशंसा पीसीआई, साई और मंत्रालय की संयुक्त शक्ति के कारण ही संभव हो पाई है। आज, मंत्री द्वारा प्रतियोगिता के सात दिनों के भीतर एथलीटों को नकद पुरस्कार प्रदान करना, खेलों को बेहतर बनाने के उनके उल्लेखनीय प्रयासों का एक और उदाहरण है।”
सुमित अंतिल ने कहा, “हम सभी मोंडो ट्रैक से बहुत खुश थे, जो वार्म-अप क्षेत्र और प्रतियोगिता क्षेत्र, दोनों में मौजूद था। इसके अलावा, होटल और परिवहन की व्यवस्था भी बहुत अच्छी थी। स्थानीय स्वयंसेवकों के साथ-साथ साई और पीसीआई ने भी हमारी बहुत मदद की।”
स्वर्ण पदक जीतने वाले शैलेश कुमार ने कहा, “यह भारत में एक बहुत बड़ा आयोजन था। मैं पहले दिन थोड़ा नर्वस था, लेकिन तैयारियाँ अच्छी थीं। ट्रैक और घरेलू समर्थन बहुत अच्छा था। मोंडो ट्रैक के अलावा, पास का जिम और फिटनेस सेंटर भी उपयोगी साबित हुआ।”
दो बार पदक जीतने वाली प्रीति पाल ने चिकित्सा केंद्र का ज्रिक करते हुए कहा, “चिकित्सा कक्ष ने हम धावकों को दौड़ के बीच में रिकवरी के लिए बहुत मदद की। विशेषकर पर आइस बाथ बहुत फायदेमंद साबित हुआ।”
केन्द्रीय खेल मंत्री ने कहा, “यह साहस की एक नई परिभाषा है जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। पूरे देश को आपकी उपलब्धियों पर गर्व है। आपने न केवल पदक जीते हैं, बल्कि हमारा दिल भी जीता है। आपने दिखा दिया है कि जब इरादे मजबूत हों, तो व्हीलचेयर भी पंख बन सकती है।”

