वाशिंगटन, 04 मई (वार्ता) होर्मुज जलडमरूमध्य में गतिरोध को तोड़ने के उद्देश्य से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से शुरू किया गया नया नौसैनिक अभियान ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में ईरान के साथ ‘न समझौता, न युद्ध’ की स्थिति को लेकर निराशा बढ़ रही है। अमेरिकी न्यूज़ वेबसाइट एक्सियोस से बातचीत में प्रशासन के एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा, “राष्ट्रपति कार्रवाई चाहते हैं। वह चुपचाप बैठे नहीं रहना चाहते। वह दबाव बनाना चाहते हैं। वह एक समझौता चाहते हैं।”
अधिकारियों का कहना है कि कूटनीति पर जोर देने के बावजूद, श्री ट्रंप बंद दरवाजों के पीछे ईरान के लिए कड़े सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। इसमें अमेरिकी युद्धपोतों को जलडमरूमध्य के माध्यम से सीधे भेजकर उसे जबरन खोलने का विकल्प भी शामिल है। इस नौसैनिक अभियान के हिस्से के रूप में अमेरिकी नौसेना सोमवार से अमेरिकी ध्वज वाले और अन्य वाणिज्यिक जहाजों को जलडमरूमध्य पार करने में मदद करेगी। इसके तहत जहाजों को बारूदी सुरंगों (माइन्स) से बचने की सलाह दी जाएगी और ईरान द्वारा हमला किए जाने की स्थिति में हस्तक्षेप के लिए तैयार रहा जाएगा। सेंटकॉम के अनुसार, इस अभियान में गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक, ड्रोन, 100 से अधिक विमान और लगभग 15,000 कर्मी शामिल होंगे। एक अधिकारी ने इसे ‘एक ऐसी प्रक्रिया की शुरुआत’ बताया जो ईरान की प्रतिक्रिया के आधार पर टकराव का रूप ले सकती है।
ईरानी सांसद और संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के अध्यक्ष इब्राहिम अजीजी ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी अमेरिकी हस्तक्षेप को युद्धविराम का उल्लंघन माना जाएगा। उन्होंने लिखा, “होर्मुज जलडमरूमध्य की नई समुद्री व्यवस्था में किसी भी अमेरिकी हस्तक्षेप को उल्लंघन माना जाएगा। होर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी का प्रबंधन श्री ट्रंप की काल्पनिक पोस्टों से नहीं होगा!”
हालांकि, कूटनीति पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। अमेरिकी दूत जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ अभी भी ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ प्रस्तावों का आदान-प्रदान कर रहे हैं। हालांकि दोनों पक्षों के अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि उनके बीच मतभेद अभी भी काफी गहरे हैं। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने धीमी और अप्रत्यक्ष संचार व्यवस्था की ओर इशारा करते हुए कहा, “बातचीत हो रही है और प्रस्ताव भी दिए जा रहे हैं। हमें उनका प्रस्ताव पसंद नहीं है और उन्हें हमारा।”

