
सारनी। बकाया वेतन, रोजगार छिनने और सुरक्षा के अभाव से भड़का आक्रोश अब भूख हड़ताल की चेतावनी के साथ जिला कलेक्टर बैतूल को ज्ञापन सौंपा।वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (डब्ल्यूसीएल) के पाथाखेड़ा क्षेत्र की कोयला खदानों में कार्यरत ठेका मजदूर इन दिनों भीषण आर्थिक, सामाजिक और सुरक्षा संकट से गुजर रहे हैं। मजदूरों का आरोप है कि उनके साथ न केवल अन्यायपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है, बल्कि श्रम कानूनों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
मजदूरों के अनुसार हाई पावर कमेटी (एचपीसी) द्वारा निर्धारित लगभग ₹1365 प्रतिदिन की मजदूरी के विपरीत उन्हें या तो कम भुगतान किया जा रहा है या फिर कई महीनों से वेतन ही नहीं मिला है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि सैकड़ों मजदूर परिवार भरण-पोषण के संकट से जूझ रहे हैं। इसके साथ ही कोल माइंस प्रोविडेंट फंड (CMPF), कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) एवं अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ भी उन्हें नहीं मिल रहा, जिससे उनका भविष्य अधर में लटक गया है।
सुरक्षा व्यवस्था बनी मजाक, हर दिन जान का खतरा
खदानों में कार्यरत मजदूरों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर लापरवाही सामने आई है। हेलमेट, सेफ्टी जूते, दस्ताने जैसे आवश्यक सुरक्षा उपकरण पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। प्राथमिक उपचार और चिकित्सा सुविधाओं का अभाव किसी भी दुर्घटना की स्थिति में मजदूरों के जीवन को सीधे खतरे में डाल रहा है।
समझौता भी बेअसर, 80 मजदूर अब भी बेरोजगार
गौरतलब है कि मजदूरों ने 4 फरवरी 2026 से अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई थी और 18 दिनों तक शांतिपूर्ण आंदोलन भी किया। इसके बाद प्रशासन, प्रबंधन और ठेकेदारों के बीच समझौता हुआ, जिसमें 3 दिनों के भीतर बकाया वेतन भुगतान और 16 मार्च 2026 तक सभी मजदूरों को काम पर वापस लेने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन आज तक न तो अधिकांश मजदूरों को उनका पैसा मिला और न ही लगभग 80 मजदूरों को रोजगार वापस दिया गया।सबूत मौजूद, फिर भी कार्रवाई नहीं!मजदूरों का दावा है कि ठेकेदारों और सुपरवाइजरों की कथित मनमानी और शोषण के ऑडियो-वीडियो प्रमाण भी मौजूद हैं। बावजूद इसके प्रशासन द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने से मजदूरों में गहरा आक्रोश है।आंदोलन की आहट भूख हड़ताल की चेतावनी,स्थिति अब विस्फोटक होती जा रही है। मजदूरों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो वे भूख हड़ताल और आमरण अनशन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे, जिससे क्षेत्र की कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
कलेक्टर से त्वरित हस्तक्षेप की मांग,मजदूरों ने जिला कलेक्टर से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने, दोषी ठेकेदारों और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करने, बकाया वेतन का तत्काल भुगतान सुनिश्चित करने और सभी मजदूरों को पुनः रोजगार देने की मांग की है। ठेका मजदूरों का नेतृत्व कर रहे समाजसेवी एकात्म फोड़ेशन के नेता प्रदीप नागले ,मनोज पवार ने कलेक्टर सौरभ सोनवाने बैतूल को ज्ञापन सौंपकर मजदूरों की आप बीती बताई। जिला कलेक्टर ने जल्द ही सारनी पहुंचकर निराकरण करने की बात कही वही विधायक डॉ योगेश पंडाग्रे से मुलाकात कर चर्चा की उन्होंने कहा तीन दिनों के भीतर ठेकदारों ने मजदूरों के वेतन सम्बन्ध में निराकरण नहीं किया तो हड़ताल में शामिल होकर साथ लड़ने की बात कही।
जिला कलेक्टर बैतूल प्रशासन इस गंभीर मामले में कितनी तत्परता दिखाता है, क्योंकि यह सिर्फ मजदूरों की लड़ाई नहीं, बल्कि उनके अस्तित्व और सम्मान की जंग बन चुकी है।
