एकीकृत थिएटर कमान भारतीय सेनाओं के लिए “अपरिवर्तनीय” सुधार प्रक्रिया: जनरल चौहान

नयी दिल्ली, 04 मई (वार्ता) प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान ने एकीकृत थिएटर कमान को भारतीय सेनाओं के लिए “अपरिवर्तनीय” सुधार प्रक्रिया करार देते हुए जोर देकर कहा है कि सेनाओं को बदलते खतरों के अनुसार खुद को तेजी से ढालना होगा और सेना, नौसेना तथा वायु सेना के बीच संयुक्तता, एकीकरण और डिजिटलीकरण की प्रक्रिया को मजबूत बनाना होगा। जनरल चौहान ने साेमवार को यहां यूनाइटेड सर्विस इन्स्टीट्यूट (यूएसआई) में मेजर जनरल समीर सिन्हा स्मृति व्याख्यान के दौरान ‘संयुक्तता और थिएटराइजेशन: प्रमुख चुनौतियाँ और प्रगति’ विषय पर कहा कि एकीकृत थिएटर कमान की स्थापना उन्हें प्रमुख रक्षा अध्यक्ष और सैन्य मामलों के विभाग के सचिव के रूप में सौंपा गया एक महत्वपूर्ण दायित्व है।

उन्होंने कहा, “संयुक्त या एकीकृत थिएटर कमान की स्थापना मेरे कार्य का हिस्सा है, सीडीएस और डीएमए के सचिव के रूप में।” सैन्य पुनर्गठन के रोडमैप को समझाते हुए उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया तीन चरणों में आगे बढ़ रही है — “संयुक्तता से एकीकरण और फिर थिएटर कमान तक।” उन्होंने स्वीकार किया कि शुरू में सशस्त्र सेनाओं ने यह गलती की कि उन्होंने थिएटर कमान पर सीधे ध्यान केंद्रित किया, बजाय इसके कि पहले मजबूत आधार तैयार किया जाता। उन्होंने कहा, “हमने पहले संयुक्त थिएटर कमांड के बारे में सोचना शुरू किया, बजाय इसके कि हम एकीकरण और संयुक्तता पर ध्यान देते। बाद में हमने इस दिशा में सुधार किया।”

जनरल चौहान ने इस बदलाव को “कठिन, आकर्षणहीन और समय लेने वाली प्रक्रिया” बताया और कहा कि पिछले ढाई वर्षों से सशस्त्र सेनाएँ ऐसे संरचनात्मक सुधारों पर काम कर रही हैं जो सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं देते, लेकिन दीर्घकालिक सैन्य परिवर्तन के लिए बेहद जरूरी हैं। उन्होंने संयुक्तता को तीनों सेनाओं के बीच “भावना और सामंजस्य” पैदा करने वाला बताया और कहा कि इसके लिए विश्वास पैदा और लंबे समय से मौजूद संस्थागत दीवारों को तोड़ना आवश्यक है। प्रमुख रक्षा अध्यक्ष ने कहा ,”संयुक्तता भावना और सामंजस्य की बात है। यह ऐसा वातावरण बनाती है जिसमें सेनाएँ एक-दूसरे के सामने अपनी बात बिना गलत समझे रख सकें।” उन्होंने कहा कि एकीकरण के प्रयास आठ क्षेत्रों में किए जा रहे हैं, जिनमें संचालन और खुफिया जानकारी, रसद, संचार, प्रशिक्षण, क्षमता विकास, मानव संसाधन, कानूनी व्यवस्था और प्रशासन शामिल हैं।

सैन्य डिजिटलीकरण में प्रगति पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि तीनों सेनाओं के बीच तालमेल सुनिश्चित करने के लिए साझा संचार प्रणाली विकसित की जा रही है। उन्होंने कहा, “अगर थिएटर कमान एक-दूसरे से बात ही नहीं कर सकें, तो उनका कोई मतलब नहीं है,” और संयुक्त संचार संरचना, सुरक्षित मोबाइल प्रणाली, साझा साइबर सुरक्षा ढाँचा और एकीकृत क्रिप्टोग्राफिक प्रणाली के विकास का उल्लेख किया। सीडीएस ने आधुनिक युद्ध में बदलती प्रवृत्तियों जैसे रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान से जुड़े तनाव का हवाला देते हुए भारत की वायु रक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाने की जरूरत पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, “आज के युद्ध ने ड्रोन, धीमी गति वाले खतरों और बैलिस्टिक मिसाइलों के महत्व को दिखाया है। अब समय की मांग है कि तीनों सेनाओं की वायु रक्षा प्रणालियों को एकीकृत किया जाए।”
जनरल चौहान ने कहा कि सेना, नौसेना और वायु सेना के बीच भंडारण प्रणाली को भी एकीकृत किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “हमें यह तक नहीं पता होता कि किसके पास क्या है। यह एक बड़ी चुनौती थी।

नई एकीकृत रसद प्रबंधन प्रणाली से सभी सेनाएँ एक-दूसरे के भंडार को ऑनलाइन देख सकेंगी।”
कानूनी सुधारों पर उन्होंने कहा कि संसद पहले ही इंटर-सर्विसेज ऑर्गनाइजेशन्स (कमांड, कंट्रोल और अनुशासन) अधिनियम पारित कर चुकी है, जिससे संयुक्त संगठनों के कमांडरों को सभी सेवाओं के कर्मियों पर अनुशासनात्मक अधिकार मिल गया है। उन्होंने कहा कि एकीकृत सैन्य कानूनी ढाँचा बनाने पर काम शुरू हो चुका है।उन्होंने कहा, “अंततः हमें सेना अधिनियम, नौसेना अधिनियम और वायु सेना अधिनियम को समाप्त करना होगा… हम एक त्रि-सेवा अधिनियम पर काम कर रहे हैं।”

जनरल चौहान ने बताया कि कुल 197 एकीकरण पहलें पहचानी गई हैं, जिनमें से 48 पूरी हो चुकी हैं और 34 पूरी होने के करीब हैं। उन्होंने कहा कि मई के अंत तक एक संयुक्त संचालन केंद्र चालू हो जाएगा, जो भविष्य की कमान संरचना के निर्माण का हिस्सा है। उन्होंने वैश्विक अस्थिरता, तेजी से बदलती तकनीक और देशों द्वारा बढ़ते बल प्रयोग का हवाला देते हुए कहा, “हमें बदलना होगा, जितना जल्दी उतना बेहतर।” अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि भारत की सैन्य संरचना में बदलाव अब अनिवार्य है। उन्होंने कहा, “इक्कीसवीं सदी में भारत की सुरक्षा के लिए एकीकृत संयुक्त बल की जरूरत है, न कि तीन उत्कृष्ट सेनाएँ जो अलग-अलग समानांतर काम कर रही हों। दिशा स्पष्ट है, नींव ईंट-दर-ईंट रखी जा चुकी है और गति अब अपरिवर्तनीय है।”

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