मोहन बोले जातिवाद छोड़ो, वसुंधरा ने जोड़ा कांग्रेस ने अंबेडकर को दलित भाजपा ने ललित बनाया

इंदौर. सामाजिक एकता के लिए जातिवाद के दंश से बाहर निकलना होगा। हमे अपनी आजादी, एकता पर गर्व करना है , समानता के सिद्धांत पर चलना होगा.

यह बात अंबेडकर सम्मान अभियान के तहत आयोजित संगोष्ठी में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कही. मुख्यमंत्री यादव ने बताया कि देश में आजादी के बाद रियासतों को मिलाने का काम सरदार वल्लभ भाई पटेल कर रहे थे. उस समय वसुंधरा राजे के पिता जीवाजी राव सिंधिया ने सबसे पहले अपनी रियासत सरकार को सौंपने का काम किया. बड़ौदा महाराज, जो आपके ही सहयोगी थे, उन्होंने बाबा साहब को पढ़ने लंदन भेजा. बाबा साहब ने अपने गुरु का जीवन पर्यंत स्मरण किया और उनके दिए सरनेम को स्वयं से जोड़े रखा. उनका व्यक्तित्व महान और विराट था, जिसकी चर्चा विश्व भर में महान संविधान निर्माता के रूप में की जाती है.बाबा साहेब को नेहरू ने चुनाव हराने का काम किया और मरने बाद भी दुश्मनी निभाई. बाबा साहब के लिए जितने भी पाप किए वो कांग्रेस ने किए है.उनके उत्थान के लिए अटलजी और नरेंद्र मोदी ने अलग अलग स्थानों पर स्मारक बनाने और बनाए जाने के काम चल रहा है, वो सब भाजपा की देन है.

उधर,भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा कि देश के संविधान निर्माता बाबा साहेब का कांग्रेस ने कभी सम्मान नहीं किया, जिसके वे हकदार थे. उन्होंने गरीब और अमीर सबको एक समानता का अधिकार देने की बात कही. कांग्रेस ने हमेशा उनको दलित बताया और भाजपा ने ललित बताया. ललित का अर्थ श्रेष्ठ होता है. बाबा साहेब कहते थे कि पढ़ना जरूरी है. पढ़ाई से आप बहुत कुछ कर सकते हो, आज टेक्नोलॉजी का जमाना है. हर व्यक्ति को, युवाओं को पढ़ना चाहिए , गरीब हो या अन्य समाज का व्यक्ति पढ़ेंगे तो अपने अधिकार और सही बात का आंकलन कर पाएंगे.

नेहरू और कांग्रेस ने चुनाव हराया

राजे ने बताया कि बाबा साहब को बड़ौदा महाराज ने पढ़ाई के लिए बहर भेजा जब भी उस समय उनका विरोध किया गया था. नेहरू और कांग्रेस ने उनको चुनाव हराने का काम किया. बंबई कॉन्टिजेंसी में उनके सामने चर्चित क्रिकेट खिलाड़ी को मैदान में उतारा, फिर भी वे चुनाव जीत गए. उनको चुनाव हराने वाले को पद्मभूषण और बाबा साहब अम्बेडकर को कुछ नहीं. संविधान सभा में भी नेहरू उनको नहीं चाहते थे और कई बार मना किया, लेकिन उनको संविधान सभा में उनके अनुभव और ज्ञान के आधार पर रखना पड़ा. आज समानता का विचार संविधान में रखा है तो अंबेडकर की वजह से है. आज जीवन जीने और जियो और जीने दो के सिद्धांत के जनक ने यह काम संविधान बना कर किया है.

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