तमाम तरह की स्वतंत्रता प्रेस की आजादी पर टिकी हैः एंटोनियो गुटेरेस

न्यूयॉर्क, 03 मई (वार्ता) संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने रविवार को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दुनिया भर में पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा करने और सच्चाई बताने वालों को सुरक्षित रखने का आह्वान किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता के बिना मानवाधिकार, निरंतर विकास और शांति की कल्पना नहीं की जा सकती। श्री गुटेरेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संदेश में कहा, “तमाम तरह की स्वतंत्रता प्रेस की आजादी पर टिकी है। इसके बिना न तो मानवाधिकार संभव हैं, न ही शांति। आइए हम पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा करें और एक ऐसी दुनिया बनाएं जहां सच बोलने वाले सुरक्षित रहें।”

महासचिव का यह बयान ऐसे समय में आया है जब रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (आरएसएफ) द्वारा जारी ‘विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक 2026’ में वैश्विक स्तर पर पत्रकारिता की स्थिति को लेकर बेहद चिंताजनक तस्वीर पेश की गई है। सूचकांक के 25 साल के इतिहास में पहली बार दुनिया के आधे से अधिक देशों (52.2 प्रतिशत) को प्रेस स्वतंत्रता के मामले में ‘कठिन’ या ‘गंभीर’ श्रेणी में रखा गया है। साल 2002 में यह आंकड़ा महज 13.7 प्रतिशत था। आरएसएफ की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 के सूचकांक में दुनिया के 180 देशों और क्षेत्रों का औसत स्कोर अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुँच गया है। रिपोर्ट में विशेष रूप से ‘कानूनी संकेतक’ में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जो इस बात का संकेत है कि दुनिया भर में पत्रकारिता का अपराधीकरण बढ़ रहा है। राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी कानूनों का दुरुपयोग कर पत्रकारों को चुप कराने की कोशिशें की जा रही हैं।

सूचकांक के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, भारत इस सूची में 157वें स्थान पर है, जबकि अमेरिका भी सात पायदान गिरकर 64वें स्थान पर आ गया है। नॉर्वे लगातार दसवें वर्ष शीर्ष पर बना हुआ है, जबकि इरिट्रिया 180वें स्थान के साथ सबसे निचले पायदान पर है। रिपोर्ट के अनुसार, आज दुनिया की एक प्रतिशत से भी कम आबादी उन देशों में रहती है जहाँ प्रेस की स्थिति ‘अच्छी’ मानी गई है। 2002 में यह संख्या 20 प्रतिशत थी रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि साल 2025 में गाजा, सूडान और अन्य संघर्ष क्षेत्रों में 220 से अधिक पत्रकारों की जान गई है, जबकि दुनिया भर में 533 पत्रकार फिलहाल सलाखों के पीछे हैं, जो प्रेस की स्वतंत्रता और सुरक्षा पर मंडराते बड़े खतरे को दर्शाता है।

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