जबलपुर: हाईकोर्ट के अपने अहम आदेश में कहा है कि आवेदन की अंतिम तिथि तक निर्धारित योग्यता होना अनिर्वाय है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने कहा है कि याचिकाकर्ताओ को कोई भी फायदा देना समानता के सिद्धांत का उल्लंघन होगा। जो हमारे संविधान के तहत मौलिक अधिकारों की रीढ़ है। युगलपीठ ने उक्त आदेश के साथ दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया।
कीर्ति पटैल, शिव चरण सहित प्रदेश के विभिन्न जिलो से एक सैकडा से अधिक याचिका कर्ताओं की तरफ से दायर याचिका में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति के लिए एग्जाम में शामिल होने की इजाज़त देने की राहत चाही गयी थी। याचिका में कहा गया था कि असिस्टेंट प्रोफेसर की पोस्ट के लिए एलिजिबिलिटी क्वालिफिकेशन संबंधित विषय में पोस्ट ग्रेजुएट व पीडीसी है। विज्ञापन के अनुसार एप्लीकेशन जमा करने की अंतिम आखिरी 26 मार्च 2025 तक शैक्षणिक योग्यता आवष्यक था। जिसे बाद में 10 अप्रैल 2025 तक बढ़ा दिया गया था।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे अपने कोर्स के आखिरी सेमेस्टर के स्टूडेंट थे और सिलेक्शन प्रोसेस पूरा होने तक क्वालिफाई पूर्ण हो जायेगी। दूसरे पदों की नियुक्ति के लिए ऐसी अनुमति प्रदान की गयी है।युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि आवेदन की अंतिम तिथि तक आवेदक के पास निर्धारित योग्यता होना आवश्यक है। कुछ उम्मीदवार ऐसे भी होगे जो याचिका कर्ताओं के सीनियर होगे। पदों की संख्या निर्धारित है और याचिकाकर्ताओं को अनुमति प्रदान की जाती है तो यह उनके साथ अन्याय होगा। युगलपीठ ने उक्त आदेश के साथ सभी याचिकाओं को निरस्त कर दिया।
