श्योपुर: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर हुए भीषण सड़क हादसे ने श्योपुर के चैनपुरा गांव को झकझोर कर रख दिया। हादसे में एक ही परिवार के पांच सदस्यों और चालक समेत छह लोगों की कार में जिंदा जलकर मौत हो गई। जब एक ही अर्थी पर पांच बॉक्स में रखी अस्थियों की अंतिम यात्रा निकली तो पूरा गांव गमगीन हो गया। निजी खेत पर एक ही चिता पर पांचों बक्से रखकर अंतिम संस्कार किया गया। दामाद विनोद आदिवासी ने मुखाग्नि दी।
यह दर्दनाक हादसा अलवर में लक्ष्मणगढ़ के पास एक्सप्रेस-वे के पिलर 115/300 पर हुआ। श्योपुर के चैनपुरा निवासी पार्वती बाई (55), दामाद संतोष (35), बेटी शशि (30), नाती साक्षी (9) और रिश्तेदार छोटीबाई (79) वैष्णो देवी दर्शन के लिए अर्टिगा कार से निकले थे। बीती रात कार में भीषण आग लग गई। पांचों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि ड्राइवर विनोद मेहरा ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। हादसा इतना भयावह था कि शवों की पहचान मुश्किल हो गई। पुलिस ने डीएनए सैंपल लेकर बक्सों में अस्थियां श्योपुर भेजीं।
पार्वतीबाई के पति का 20 साल पहले निधन हो चुका था। उनकी दो बेटियां शशि और रचना हैं। शशि की शादी 18 साल पहले सिरसौद निवासी संतोष से हुई थी। संतोष घर जमाई बनकर परिवार संभालता था। बेटी रचना ने बताया कि मां की मानसिक स्थिति दो साल से ठीक नहीं थी। कुछ दिन पहले उन्होंने कहा था कि अब ठीक हूं, वैष्णो देवी जाना है और फिर गंगाजी स्नान करना है। यही उनकी अंतिम इच्छा थी। इसके लिए अर्टिगा किराए पर लेकर परिवार निकला था। रचना को भी साथ चलने को कहा, लेकिन गर्मी और बच्चों की वजह से वह नहीं गई। लौटकर गंगा स्नान का कार्यक्रम था, पर उससे पहले ही काल ने सब छीन लिया।
कार चला रहे विनोद मेहरा नागदा गांव के रहने वाले थे। वह किराए पर गाड़ी चलाकर परिवार पालते थे। दो बच्चों के पिता विनोद ने करीब 20 हजार रुपये में यात्रा तय की थी। हादसे में उनकी भी मौत हो गई। पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है।चैनपुरा में हादसे की खबर मिलते ही मातम पसर गया। पड़ोसी जुबराज आदिवासी ने बताया कि उनकी मां छोटीबाई कुछ दिन पहले ही श्योपुर आई थीं। अचानक यात्रा का प्लान बना और संतोष के कहने पर वह भी साथ चली गईं। किसी ने सोचा नहीं था कि यह सफर आखिरी होगा।
