​बाल तस्करी की आशंका: अंत्योदय एक्सप्रेस से 26 नाबालिगों का रेस्क्यू

सागर। अंत्योदय एक्सप्रेस ट्रेन से लगभग 100 नाबालिग बच्चों को अहमदाबाद के लिए ले जाया जा रहा है। आशंका के चलते इन सभी बच्चों को बाल श्रम के लिए भेजा जा रहा है। यह जानकारी मिलते ही आयोग के सदस्य ओमकार सिह द्वारा इसकी सूचना सागर सीडब्ल्यूसी सहित अन्य अधिकारियों को दी गई। जानकारी मिलते ही सागर सीडब्ल्यूसी के सदस्य एवं किशोर न्यायालय बोर्ड के सदस्यों द्वारा कार्यवाही करते हुए सागर जीआरपी को इसकी सूचना दी गई । सीडब्ल्यूसी के सदस्य एवं किशोर न्यायालय बोर्ड के सदस्यों तथा कुछ सामाजिक कार्यकर्ता सागर स्टेशन पहुंचे जहां सदस्यों द्वारा देखा गया कि अलग-अलग बोगियों में नाबालिग बैठे हुए हैं जिनके साथ कोई भी अभिभावक या जिम्मेदार व्यक्ति नहीं था, लेकिन जब सागर जीआरपी से इन बच्चों को स्टेशन पर उतारने की बात कही गई थी। जीआरपी द्वारा समय का अभाव एवं पुलिस बल न होने की बात कहते हुए कार्यवाही से अपना हाथ खीच लिया। जिसके बाद सभी सदस्य व सामाजिक कार्यकर्ता ट्रेन में सवार होकर नाबालिकों के साथ बीना स्टेशन रवाना हो गये इस बीच सागर जीआरपी द्वारा आश्वासन दिया गया कि बीना रेल्वे स्टेशन पर पर्याप्त पुलिस बल है जिससे उन बच्चों को रेस्क्यू किया जा सकता है लेकिन जब ट्रेन बीना पहुंची तो वहां पुलिस बल तो था लेकिन अधिकारियों द्वारा ट्रेन में नाबालिगों को तलाश करने जहमत नहीं उठाई गई, बल्कि समिति के सदस्यों से ही पूंछतांछ करते हुए टाइम निकल गया और ट्रेन स्टेशन से आगे बढ़ गई। किशोर न्यायालय बोर्ड की सदस्य वंदना तोमर एवं चंद्रप्रकाश शुक्ला ने बताया कि हम सभी लोग ट्रेन में सवार होकर बोगियों में बच्चों को चिंहित करके आये कि किस बोगी में कितने बच्चे हैं, लगातार पुलिस से संपर्क भी हो रहा था लेकिन बीना स्टेशन पर कार्यवाही नहीं हो पाई।

मक्सी तथा उज्जैन रेलवे स्टेशन पर गुरुवार रात बच्चों की तस्करी की सूचना पर बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। अंत्योदय एक्सप्रेस ट्रेन को उज्जैन और फिर नागदा स्टेशन पर रोककर पुलिस, बाल कल्याण समिति और अन्य विभागों की टीम ने 26 नाबालिग बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला।जानकारी के मुताबिक, बाल कल्याण समिति को सूचना मिली थी कि करीब 100 बच्चों को मजदूरी के लिए मुजफ्फरनगर से अहमदाबाद ले जाया जा रहा है। सूचना मिलते ही उज्जैन में चार थानों का बल, आरपीएफ, जीआरपी, श्रम विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम को अलर्ट किया गया।

गुरुवार रात करीब 11 बजे जैसे ही अंत्योदय एक्सप्रेस मक्सी तथा उज्जैन स्टेशन पहुंची, टीम ने ट्रेन में सर्चिंग शुरू की। करीब आधे घंटे तक 50 से अधिक बच्चों और उनके साथ मौजूद लोगों से पूछताछ की गई, जिसमें शुरुआती तौर पर 4 बच्चों को रेस्क्यू किया गया। इसी दौरान ट्रेन आगे बढ़ गई।

रेस्क्यू ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहीं सीएसपी दीपिका शिंदे ने तत्काल नागदा स्टेशन को सूचना देकर ट्रेन रुकवाई। वहां एक घंटे तक चली सर्चिंग के बाद 22 और नाबालिग बच्चों को ट्रेन से उतारा गया। इस तरह कुल 26 बच्चों को रेस्क्यू किया गया।

नागदा से उतारे गए सभी बच्चे नाबालिग बताए जा रहे हैं, जिनमें से दो की उम्र 14 साल से भी कम है। सभी बच्चों को फिलहाल उज्जैन जीआरपी को सौंप दिया गया है। परिजनों से संपर्क कर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी, वहीं बच्चों को फिलहाल उज्जैन में रखा जाएगा।

पुलिस को आशंका है कि बच्चों को मजदूरी के लिए गुजरात ले जाया जा रहा था, हालांकि कुछ बच्चे सोमनाथ और अन्य स्थानों पर घूमने जाने की बात भी कह रहे हैं। मामले की जांच जारी है।

श्रम विभाग की सहायक आयुक्त राखी जोशी के अनुसार, सूचना थी कि चार लोग 100 से अधिक नाबालिगों को गुजरात ले जा रहे हैं। फिलहाल यह पता लगाया जा रहा है कि बच्चों को किस उद्देश्य से और किन लोगों द्वारा ले जाया जा रहा था।

बाल आयोग के पूर्व सदस्य ओमकार सिंह ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि अंतोदय एक्सप्रेस द्वारा लगभग 100 नाबालिगों को सागर से गुजरात ले जाया जा रहा है। जिसमें की बच्चों से हो सकता है, बालश्रम कराया जाये या उनके साथ कोई अन्य घटना भी हो सकती है, इसको लेकर हम सभी लोगों ने संबंधित सागर एवं बीना स्टेशन पर जानकारी दी लेकिन कार्यवाही नहीं हो पाई। वहीं दूसरी ओर आशंका जताई जा रही है इतनी बड़ी संख्या में बच्चों का इस तरह अकेले जाना किसी बड़े गिरोह का काम हो सकता है। अगर सागर-बीना पुलिस कार्यवाही में तत्परता दिखाती तो 100 बच्चे सागर या बीना में सुरक्षित निकाले जा सकते थे, समिति के सदस्यों, सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा सागर से बीना तक सवार होकर खुद उन बच्चों को चिंहित किया गया था। वहीं दूसरी ओर उज्जैन पुलिस के पास ंिचंहित बच्चों की जानकारी नहीं जिसके कारण केवल 26 बच्चे ही मिल सके। सागर से बीना स्टेशन तक कि गई कार्यवाही में किशोर न्यायालय बोर्ड की सदस्य वंदना तोमर, चंद्रप्रकाश शुक्ला, बाल कल्याण समिति के सदस्य भगवतशरण बनवारिया, अनिल रैकवार, सुरेंद्र सेन, सामाजिक कार्यकर्ताओं में केएसएस से लक्ष्मी अवस्थी, हरनाम सिंह, प्रशांत सेन, संकल्प संस्था से देवेंद्र दुबे, आवास संस्था से मालती पटैल सहित अन्य सामाजिक कार्यकर्ता शामिल रहे।

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