केदारनाथ, 01 मई (वार्ता) उत्तराखंड में केदारनाथ धाम में वीआईपी दर्शन को लेकर शुक्रवार को उस समय विवाद गहरा गया, जब देश के प्रमुख उद्योगपति गौतम अडानी के दर्शन के दौरान तीर्थ पुरोहितों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। केदारनाथ मंदिर परिसर में एकत्रित पुरोहितों ने (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाए और वीआईपी गेट को बंद करने की मांग उठाई। विरोध का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे मामला और तूल पकड़ता दिख रहा है।
बताया जा रहा है कि श्री अडानी पत्नी प्रीति अडानी के साथ अपनी शादी की 40वीं वर्षगांठ के अवसर पर बाबा केदार के दर्शन करने पहुंचे थे। दोनों ने मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर जलाभिषेक किया और भगवान शिव से आशीर्वाद लिया। वह सुबह दिल्ली से देहरादून पहुंचे और वहां से निजी हेलिकॉप्टर के माध्यम से केदारनाथ धाम पहुंचे।
दर्शन के बाद श्री अडाणी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने अनुभव साझा करते हुए इसे उनके जीवन का विशेष दिन बताया। उन्होंने एक ओर अपनी वैवाहिक वर्षगांठ और दूसरी ओर देश की प्रगति और समृद्धि की कामना की। साथ ही उन्होंने कर्मचारियों से संवाद बढ़ाने के उद्देश्य से “अपनी बात, अपनों के साथ” नामक नई पहल की घोषणा भी की।
धार्मिक यात्रा के साथ-साथ श्री अडाणी ने प्रस्तावित सोनप्रयाग-केदारनाथ रोपवे परियोजना का एरियल सर्वे करने की भी योजना बनाई। यह परियोजना श्री अडानी के नेतृत्व में विकसित की जा रही है। करीब 13 किलोमीटर लंबे इस रोपवे के निर्माण के बाद वर्तमान में 16 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा, जिसमें आठ से नौ घंटे लगते हैं, घटकर लगभग 36 मिनट रह जाएगी। लगभग 4,081 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली यह परियोजना अत्याधुनिक 3एस (थ्री-केबल) तकनीक पर आधारित होगी, जिसकी क्षमता प्रति घंटे करीब 1,800 यात्रियों को एक दिशा में ले जाने की होगी।
इधर, तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि वीआईपी दर्शन की व्यवस्था से आम श्रद्धालुओं के साथ भेदभाव होता है और इससे धार्मिक परंपराओं पर भी असर पड़ता है। वहीं प्रशासन इसे भीड़ प्रबंधन और व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम बता रहा है। फिलहाल इस मुद्दे पर टकराव की स्थिति बनी हुई है और आने वाले समय में इस पर कोई समाधान निकलता है या नहीं, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।
